सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के जनजातीय इलाकों से लगातार बुखार के कई मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज की टीम सक्रिय हो गई है। क्षेत्र में करीब 72 लोगों के लंबे समय से बुखार से पीड़ित होने की जानकारी सामने आई है। लगातार बुखार रहने के कारण अब चिकित्सकों की टीम इसके पीछे संभावित संक्रमण की वजह तलाश रही है।
मेडिकल कॉलेज की टीम खास तौर पर लेप्टोस्पाइरा (Leptospira) और स्क्रब टाइफस जैसे संक्रमणों की जांच कर रही है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि इन सभी मरीजों में इनमें से किसी बीमारी की पुष्टि हुई है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की जांच रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहा है।
जनजातीय क्षेत्रों में लगातार बुखार से बढ़ी चिंता
सरगुजा के दूरस्थ और जनजातीय इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच लगातार बुखार के मामले सामने आने से स्थानीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि कई लोगों में बुखार लंबे समय तक बना हुआ है और सामान्य उपचार के बाद भी राहत नहीं मिल रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को कई दिनों तक लगातार बुखार बना रहता है तो उसके पीछे कई तरह के वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण हो सकते हैं। इसी वजह से मेडिकल कॉलेज की टीम सामान्य बुखार के बजाय संभावित संक्रमणों की विस्तृत जांच कर रही है।
72 मरीजों की जानकारी के बाद जांच तेज
क्षेत्र में करीब 72 लोगों के लगातार बुखार से प्रभावित होने की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है। खासतौर पर पहाड़ी कोरवा और पंडो जनजाति से जुड़े क्षेत्रों में सामने आए मामलों को लेकर मेडिकल टीम जानकारी जुटा रही है।
जिन मरीजों को करीब पांच दिन या उससे अधिक समय से बुखार बना हुआ है, उनकी स्थिति और लक्षणों का परीक्षण किया जा रहा है। इसके साथ ही जरूरत के अनुसार मरीजों के सैंपल लेकर उनकी जांच कराने की तैयारी है।
लेप्टोस्पाइरा और स्क्रब टाइफस पर क्यों है नजर?
मेडिकल टीम की जांच में लेप्टोस्पाइरा संक्रमण और स्क्रब टाइफस को भी संभावित कारणों में शामिल किया गया है। दोनों संक्रमणों में बुखार प्रमुख लक्षणों में शामिल हो सकता है, लेकिन इनके कारण और संक्रमण फैलने का तरीका अलग-अलग होता है।
लेप्टोस्पाइरा बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है, जो संक्रमित जानवरों के मूत्र से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से इंसानों तक पहुंच सकता है। वहीं स्क्रब टाइफस एक अन्य बैक्टीरियल संक्रमण है, जो संक्रमित माइट के काटने से फैल सकता है।
इन संक्रमणों की पहचान के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है। केवल बुखार के आधार पर किसी मरीज में लेप्टोस्पायरोसिस या स्क्रब टाइफस की पुष्टि नहीं की जा सकती।
मेडिकल कॉलेज के कई विभाग मिलकर कर रहे जांच
अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज की टीम इस मामले की जांच में जुटी है। जानकारी के मुताबिक मेडिसिन, कम्युनिटी मेडिसिन और माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ मामले का अध्ययन कर रहे हैं।
टीम प्रभावित क्षेत्रों में जाकर मरीजों की स्थिति, उनके लक्षण, बीमारी की अवधि और आसपास की परिस्थितियों की जानकारी जुटा सकती है। इसके साथ ही संभावित संक्रमणों की पहचान के लिए सैंपल की जांच की जाएगी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी जानने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या सभी मरीजों में बुखार का कारण एक ही है या अलग-अलग कारणों से लोग बीमार पड़ रहे हैं।
बीमारी की पुष्टि से पहले निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी लेप्टोस्पाइरा या स्क्रब टाइफस के प्रकोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल ये संक्रमण जांच के दायरे में हैं।
ऐसे में सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर बीमारी को लेकर किसी तरह की अफवाह फैलाना उचित नहीं होगा। मेडिकल जांच पूरी होने और रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगातार बुखार के पीछे वास्तविक कारण क्या है।
स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता फिलहाल प्रभावित लोगों की जांच, बीमारी के कारण का पता लगाना और जरूरत पड़ने पर उपचार उपलब्ध कराना है।
किडनी और लिवर पर पड़ सकता है असर
चिकित्सकों के अनुसार, कुछ बैक्टीरियल संक्रमणों का समय पर इलाज नहीं होने पर शरीर के महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं। लेप्टोस्पायरोसिस के गंभीर मामलों में किडनी और लिवर पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से लंबे समय से बुखार से पीड़ित मरीजों की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बुखार, कमजोरी या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई देने पर मरीजों को स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच और उपचार कराना बेहतर है।
दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य टीम की सक्रियता जरूरी
सरगुजा के कई जनजातीय क्षेत्र भौगोलिक रूप से दूरस्थ हैं। ऐसे इलाकों में बीमारी के मामलों की समय पर पहचान और मरीजों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना बड़ी चुनौती हो सकती है। यही वजह है कि मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में जाकर जानकारी जुटाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब सभी की नजर मेडिकल जांच की रिपोर्ट पर है। जांच के परिणाम सामने आने के बाद ही पता चलेगा कि 72 लोगों में लंबे समय से चल रहे बुखार का वास्तविक कारण क्या है और क्या इसके पीछे कोई संक्रामक बीमारी जिम्मेदार है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज की टीम मामले की निगरानी और जांच में जुटी है।

