गिरीश गुप्ता गरियाबंद। मैनपुर जनपद पंचायत में वर्ष 2005 से 2007 के बीच हुई शिक्षाकर्मी भर्ती का करीब दो दशक पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों में कथित अनियमितताओं को लेकर 111 नामों वाली एक सूची सामने आने के बाद मामले में जांच और कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। अब लोगों की नजरें गरियाबंद के नवनियुक्त कलेक्टर रणबीर शर्मा पर टिकी हैं।
बताया जा रहा है कि इस भर्ती मामले में पूर्व में भी कई स्तरों पर जांच हो चुकी है। जांच के दौरान कुछ शिक्षाकर्मियों के दस्तावेजों को लेकर आपत्तियां सामने आने और कार्रवाई किए जाने की बात कही जाती रही है। जुलाई 2026 में भी संबंधित शिक्षकों की अद्यतन सूची और दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी मांगे जाने की चर्चा सामने आई थी।
111 नामों की सूची से फिर उठे सवाल
मामले में सामने आई 111 नामों की सूची में अलग-अलग अभ्यर्थियों के दस्तावेजों को लेकर विभिन्न प्रकार की आपत्तियों का उल्लेख होने की बात सामने आई है। इनमें अंकसूची, अनुभव प्रमाण-पत्र, बीएड-डीएड प्रमाण-पत्र, खेलकूद प्रमाण-पत्र, विकलांगता प्रमाण-पत्र सहित अन्य दस्तावेज शामिल बताए जा रहे हैं।
कुछ मामलों में अंकसूची संदिग्ध बताए जाने, कहीं अनुभव प्रमाण-पत्र की जांच की आवश्यकता और कुछ मामलों में दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने जैसी टिप्पणियां दर्ज होने की बात कही जा रही है। हालांकि, केवल किसी सूची में नाम दर्ज होना किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करता। संबंधित दस्तावेजों का मूल रिकॉर्ड से सत्यापन और सक्षम स्तर पर विधिवत जांच के बाद ही किसी व्यक्ति की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
वर्षों से जांच के बावजूद कार्रवाई पर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि भर्ती प्रक्रिया को लेकर वर्षों से शिकायतें और जांच चलती रही हैं, तो अब तक इसका अंतिम समाधान क्यों नहीं हो सका।
शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि समय-समय पर संबंधित विभागों और अधिकारियों से दस्तावेज तथा जांच रिपोर्ट मांगी जाती रही, लेकिन मामले में अपेक्षित कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। यही वजह है कि अब नए प्रशासन से मामले को नए सिरे से गंभीरता से देखने की उम्मीद जताई जा रही है।
नए कलेक्टर के सामने पुरानी फाइल की चुनौती
छत्तीसगढ़ शासन के 18 अगस्त 2026 के प्रशासनिक फेरबदल के बाद रणबीर शर्मा को गरियाबंद का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया। उन्होंने 21 अगस्त को गरियाबंद कलेक्टर के रूप में पदभार ग्रहण किया।
ऐसे में मैनपुर की वर्ष 2005-07 की शिक्षाकर्मी भर्ती का मामला नए कलेक्टर के सामने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन पुरानी जांच रिपोर्टों और दस्तावेजों की समीक्षा कर प्रत्येक मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाएगा।
यदि 111 नामों वाली सूची में दर्ज आपत्तियां रिकॉर्ड से प्रमाणित होती हैं, तो संबंधित मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की मांग भी उठ रही है। साथ ही भर्ती प्रक्रिया के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग की जा रही है।
दूसरे जिलों में कार्रवाई के उदाहरण
छत्तीसगढ़ में शिक्षाकर्मी भर्ती से जुड़े कथित फर्जी दस्तावेजों के मामलों में अन्य जिलों में भी कार्रवाई के उदाहरण सामने आए हैं। धमतरी जिले में वर्ष 2007 की शिक्षाकर्मी भर्ती से जुड़े एक मामले में जनवरी 2026 में आठ प्रधान पाठकों को बर्खास्त किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इन पर कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने और बाद में पदोन्नति पाने के आरोप थे।
इसी तरह गरियाबंद के मैनपुर क्षेत्र में फर्जी प्रमाण-पत्र से जुड़े एक अलग मामले में 11 शिक्षाकर्मियों को अदालत से तीन-तीन वर्ष की सजा और जुर्माने का फैसला सुनाए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
इन मामलों के बाद अब वर्ष 2005-07 की भर्ती से जुड़े पुराने प्रकरण में भी निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है।
कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलन की चेतावनी
मामले से जुड़े शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि यदि दस्तावेजों में अनियमितता के आधार पर कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, तो जिन अन्य नियुक्तियों के दस्तावेजों पर भी जांच रिपोर्ट में सवाल उठाए गए हैं, उनके मामलों में समान मापदंड अपनाया जाना चाहिए।
बताया गया है कि संबंधित पक्ष की ओर से जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मामले में कार्रवाई की मांग की गई है। उनका कहना है कि यदि मामले में निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो वे धरना-प्रदर्शन सहित आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।
शिकायतकर्ता पक्ष का सवाल है कि जब दस्तावेजों की सत्यता को आधार बनाकर कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है, तो जांच में संदिग्ध बताए गए अन्य मामलों की स्थिति भी स्पष्ट क्यों नहीं की जा रही है।
अब नए कलेक्टर से उम्मीद
नए कलेक्टर रणबीर शर्मा के पदभार संभालने के बाद मैनपुर के इस पुराने मामले को लेकर एक बार फिर उम्मीद जगी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जिला प्रशासन 111 नामों वाली सूची में शामिल प्रत्येक मामले के दस्तावेजों का निष्पक्ष और विधिवत सत्यापन कराएगा।
क्या जिन मामलों में दस्तावेज गलत या फर्जी पाए जाएंगे, उनमें नियमानुसार कार्रवाई होगी? क्या तत्कालीन भर्ती प्रक्रिया में जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होगी? और क्या करीब दो दशक से चली आ रही इस प्रक्रिया को इस बार अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाया जाएगा?
फिलहाल इन सवालों के जवाब प्रशासनिक जांच और आगामी कार्रवाई के बाद ही सामने आएंगे। हालांकि, मैनपुर की 2005-07 शिक्षाकर्मी भर्ती का मामला एक बार फिर चर्चा में है और अब जिले के नए प्रशासन से लोगों को उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाएगी।
नोट: 111 नामों की सूची में शामिल होना मात्र किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करता। दोष और जिम्मेदारी का निर्धारण मूल दस्तावेजों के सत्यापन तथा सक्षम प्राधिकारी की विधिवत जांच के बाद ही किया जा सकता है।

