छत्तीसगढ़ में इस बार रक्षाबंधन से लेकर देवउठनी एकादशी तक लगातार 84 दिनों तक त्योहारों और धार्मिक आयोजनों की धूम रहेगी। 28 अगस्त से शुरू होने वाला यह सिलसिला 20 नवंबर तक चलेगा। इस दौरान लगभग हर एक से चार दिन के अंतराल में कोई न कोई प्रमुख पर्व, व्रत या धार्मिक आयोजन होगा। त्योहारों की लगातार श्रृंखला के कारण बाजारों से लेकर मंदिरों तक विशेष रौनक देखने को मिलेगी।
धार्मिक पंचांग के अनुसार 28 अगस्त को रक्षाबंधन के साथ इस लंबे पर्वकाल की शुरुआत होगी। इसके बाद 31 अगस्त को कजरी तीज मनाई जाएगी। महज तीन दिन बाद 4 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व आएगा। इसके बाद 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी। गणेशोत्सव के बाद 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी का पर्व होगा और अगले ही दिन 26 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत होगी।
पितृपक्ष के दौरान लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध और तर्पण करेंगे। यह अवधि 26 सितंबर से शुरू होकर करीब 15 दिनों तक चलेगी। इसके बाद 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होगी। नवरात्र के नौ दिनों तक देवी आराधना के बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। इसके कुछ ही दिनों बाद 26 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा का पर्व आएगा।
त्योहारों की यह श्रृंखला यहीं खत्म नहीं होगी। 29 अक्टूबर को करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा। इसके बाद 6 नवंबर को धनतेरस, 8 नवंबर को दीपावली और 10 व 11 नवंबर को छठ पूजा का आयोजन होगा। दीपावली के बाद 15 और 16 नवंबर को देवउठनी एकादशी का पर्व मनाया जाएगा। इसी के साथ भगवान विष्णु के योगनिद्रा से जागने की मान्यता के बाद मांगलिक कार्यों के दोबारा शुरू होने का रास्ता खुलेगा।
इसके बाद 20 नवंबर को तुलसी विवाह का आयोजन होगा। धार्मिक मान्यताओं में तुलसी विवाह को भगवान विष्णु और माता तुलसी के विवाह का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही विवाह, गृह प्रवेश सहित अन्य मांगलिक कार्यों के लिए शुभ समय की शुरुआत मानी जाती है। इस तरह रक्षाबंधन से तुलसी विवाह तक करीब 84 दिनों का यह पूरा काल धार्मिक आयोजनों से भरा रहेगा।
इस अवधि में सबसे ज्यादा चहल-पहल नवरात्र, दशहरा और दीपावली के दौरान देखने को मिलेगी। नवरात्र में देवी मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, ज्योति प्रज्ज्वलन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। विजयादशमी पर रावण दहन के आयोजन होंगे। इसके बाद दीपावली के दौरान घरों और बाजारों में सजावट, खरीदारी और पूजा का सिलसिला चलेगा।
दीपावली के बाद छठ पूजा का विशेष महत्व रहेगा। छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों में रहने वाले उत्तर भारतीय समाज के लोग छठ पर्व की तैयारियों में जुटेंगे। घाटों की सफाई और सजावट के साथ सूर्य उपासना के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाएंगी।
त्योहारों की इस लंबी श्रृंखला का असर बाजार पर भी देखने को मिलेगा। रक्षाबंधन से ही मिठाई, राखी, कपड़े और उपहारों की खरीदारी शुरू हो जाएगी। गणेश चतुर्थी, नवरात्र, दशहरा और दीपावली के दौरान पूजा सामग्री, सजावटी सामान, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य वस्तुओं की मांग बढ़ने की उम्मीद है। धनतेरस और दीपावली के दौरान सोना-चांदी, वाहन और घरेलू सामान की खरीदारी भी बढ़ सकती है।
धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो यह अवधि पूजा-पाठ और व्रत-त्योहारों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। एक पर्व खत्म होते ही कुछ दिनों के भीतर दूसरा पर्व आने से लोगों के बीच लगातार उत्साह बना रहेगा। वहीं देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह के बाद मांगलिक कार्यों के लिए शुभ मुहूर्त खुलने से शादी-विवाह और अन्य शुभ आयोजनों की तैयारियां भी तेज हो जाएंगी।
पंचांग में दिए गए क्रम के मुताबिक इस बार रक्षाबंधन से देवउठनी और तुलसी विवाह तक त्योहारों का सिलसिला लगातार चलता रहेगा। 28 अगस्त से शुरू होकर 20 नवंबर तक चलने वाला यह 84 दिन का पर्वकाल धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और व्यावसायिक गतिविधियों के लिहाज से भी खास रहने वाला है।
प्रमुख पर्व और तारीखें:
28 अगस्त — रक्षाबंधन
31 अगस्त — कजरी तीज
4 सितंबर — कृष्ण जन्माष्टमी
14 सितंबर — गणेश चतुर्थी
25 सितंबर — अनंत चतुर्दशी
26 सितंबर — पितृपक्ष की शुरुआत
11 अक्टूबर — शारदीय नवरात्र की शुरुआत
20 अक्टूबर — विजयादशमी
26 अक्टूबर — शरद पूर्णिमा
29 अक्टूबर — करवा चौथ
6 नवंबर — धनतेरस
8 नवंबर — दीपावली
10-11 नवंबर — छठ पूजा
15-16 नवंबर — देवउठनी एकादशी
20 नवंबर — तुलसी विवाह
21 नवंबर — देव दीपावली
इस पूरे पर्वकाल में अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों की अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार भी कई आयोजन होंगे। यही वजह है कि अगस्त के अंतिम सप्ताह से नवंबर तक छत्तीसगढ़ में त्योहारों की लगातार रौनक देखने को मिलेगी।

