हरियाणा में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार और प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के 15 जिलों में सरकारी स्कूलों के ऊपर या परिसर के आसपास से गुजर रही हाई-टेंशन बिजली की लाइनों को हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को इस संबंध में कार्रवाई की रिपोर्ट शुक्रवार तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
मामला बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण शिक्षा विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है। स्कूल परिसरों के ऊपर से गुजरने वाली हाई-टेंशन बिजली लाइनें विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्कूल कर्मचारियों के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती हैं। खासकर बारिश के मौसम में बिजली के तारों के टूटने, शॉर्ट सर्किट या करंट फैलने जैसी घटनाओं की आशंका और बढ़ जाती है।
जानकारी के अनुसार संबंधित जिलों में शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र के सरकारी स्कूलों का निरीक्षण कर यह पता लगाने के लिए कहा गया है कि किन स्कूलों के ऊपर या परिसर के बेहद नजदीक हाई-टेंशन बिजली की लाइनें गुजर रही हैं। इसके बाद बिजली विभाग के साथ समन्वय कर ऐसी लाइनों को हटाने या सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की कार्रवाई की जानी है।
इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल बिजली की लाइनों को हटाना नहीं, बल्कि स्कूल परिसरों को विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित बनाना है। अधिकारियों से स्कूलवार स्थिति की जानकारी जुटाने और जहां जरूरी हो वहां तत्काल सुरक्षा उपाय करने को कहा गया है।
हाई-टेंशन तारों को स्कूलों से हटाने का मुद्दा नया नहीं है। हरियाणा में इससे पहले भी सरकारी स्कूलों सहित अन्य सार्वजनिक संस्थानों के ऊपर से गुजरने वाली हाई-टेंशन लाइनों को हटाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। वर्ष 2025 में हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने भी स्कूलों, पॉलिटेक्निक संस्थानों, सिविल अस्पतालों और पशु अस्पतालों के ऊपर से गुजर रही हाई-टेंशन बिजली लाइनों को हटाने को लेकर कड़ा रुख अपनाया था। आयोग ने इस संबंध में समयबद्ध कार्रवाई और रिपोर्ट मांगी थी।
अब एक बार फिर स्कूलों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए 15 जिलों से रिपोर्ट मांगी गई है। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जिन स्कूलों में ऐसी बिजली लाइनें मौजूद हैं, वहां बच्चों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानियां बरती जाएं और स्थायी समाधान के लिए बिजली विभाग के साथ कार्रवाई की जाए।
हरियाणा सरकार पहले भी स्कूलों के बुनियादी ढांचे और विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर अधिकारियों को लगातार निर्देश देती रही है। मई 2026 में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी स्कूलों की व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा और जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा स्कूलों का निरीक्षण करने पर जोर दिया गया था।
अब सभी की नजर संबंधित जिलों से मिलने वाली रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि 15 जिलों में कितने सरकारी स्कूल हाई-टेंशन तारों से प्रभावित हैं और कितने स्थानों पर बिजली की लाइनों को हटाने या स्थानांतरित करने की जरूरत है। प्रशासन की कार्रवाई पूरी होने के बाद स्कूल परिसरों में विद्यार्थियों के लिए बिजली संबंधी जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी।

