नई दिल्ली/रायपुर। लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पारित होने के बाद केंद्र सरकार और भाजपा इसे युवाओं के भविष्य की सुरक्षा तथा परीक्षा माफिया पर निर्णायक प्रहार बता रही है। वहीं विपक्षी दलों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कुछ विशेषज्ञों ने इस संशोधन की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि केवल कानून को और कठोर बनाने से परीक्षा प्रणाली में व्याप्त खामियां दूर नहीं होंगी।
विपक्ष का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में देश के कई राज्यों और राष्ट्रीय स्तर की भर्ती व प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। उनका तर्क है कि उस समय भी कानूनी प्रावधान मौजूद थे, लेकिन कमजोर निगरानी, समय पर कार्रवाई की कमी और परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही तय नहीं होने के कारण ऐसे मामलों पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी।
आलोचकों का कहना है कि यदि परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया को तकनीकी रूप से सुरक्षित नहीं बनाया गया, साइबर सुरक्षा को मजबूत नहीं किया गया और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित नहीं हुई, तो नया संशोधन भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाएगा। उनका मानना है कि कानून के साथ-साथ संस्थागत सुधार और पारदर्शिता बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक है।
शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि अभ्यर्थियों का विश्वास केवल सख्त सजा से नहीं, बल्कि निष्पक्ष परीक्षा संचालन, समयबद्ध जांच, पारदर्शी चयन प्रक्रिया और जवाबदेह परीक्षा एजेंसियों से मजबूत होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रश्नपत्रों की डिजिटल सुरक्षा, स्वतंत्र ऑडिट और परीक्षा केंद्रों की निगरानी को और मजबूत किया जाना चाहिए।
सरकार का दावा है कि संशोधन के जरिए परीक्षा माफिया, संगठित अपराध और प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगेगा। वहीं विपक्ष का कहना है कि सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि अब तक हुई पेपर लीक की घटनाओं में कितने बड़े आरोपियों को सजा मिली और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कौन-सी नई व्यवस्थाएं लागू की जाएंगी।
फिलहाल यह विधेयक लोकसभा से पारित हो चुका है। इसका वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं, कानून के क्रियान्वयन और परीक्षा व्यवस्था में होने वाले व्यावहारिक सुधारों के आधार पर ही आंका जाएगा।

