नई दिल्ली। देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर विस्तृत चर्चा हुई। सदन में सरकार और विपक्ष के बीच इस विधेयक को लेकर तीखी बहस देखने को मिली। सरकार ने इसे करोड़ों छात्रों के भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा अहम कानून बताया, जबकि विपक्ष ने परीक्षा प्रणाली की कमियों और भर्ती एजेंसियों की जवाबदेही पर सवाल उठाए।
सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं ने लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है। कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं, जिससे अभ्यर्थियों का समय और मेहनत दोनों बर्बाद हुए। इसी को देखते हुए सरकार ने मौजूदा कानून को और प्रभावी बनाने के लिए संशोधन पेश किया है, ताकि संगठित पेपर लीक गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।
क्या हैं विधेयक के प्रमुख प्रावधान?
सरकार के अनुसार संशोधन विधेयक में पेपर लीक और परीक्षा में संगठित धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। गंभीर मामलों में 10 वर्ष तक की सजा और 50 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही जांच एजेंसियों को अधिक अधिकार देने, संगठित गिरोहों पर शिकंजा कसने और मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष व्यवस्था का भी प्रावधान किया गया है।
सरकार ने क्या कहा?
लोकसभा में सरकार की ओर से कहा गया कि यह कानून किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि ईमानदारी से परीक्षा देने वाले करोड़ों छात्रों के हित में लाया गया है। सरकार ने कहा कि पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने विपक्ष से भी विधेयक का समर्थन करने और रचनात्मक सुझाव देने की अपील की।
विपक्ष ने क्या उठाए सवाल?
विपक्षी दलों ने कहा कि केवल सजा बढ़ाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। विपक्ष का कहना था कि परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय करना, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और तकनीकी सुरक्षा मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है। कई सांसदों ने पिछले वर्षों में हुए पेपर लीक मामलों का हवाला देते हुए सरकार से जवाब मांगा कि दोषियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई है।
छात्रों पर क्या पड़ेगा असर?
देशभर में सरकारी नौकरियों और विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों छात्र इस विधेयक पर नजर बनाए हुए हैं। यदि यह कानून प्रभावी रूप से लागू होता है तो परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने और संगठित पेपर लीक गिरोहों पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कानून के साथ-साथ परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार और मजबूत निगरानी व्यवस्था भी जरूरी होगी।
आगे क्या होगा?
लोकसभा में चर्चा के बाद विधेयक को संसदीय प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाएगा। दोनों सदनों से पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह संशोधित कानून पूरे देश में लागू हो सकेगा। इसके बाद केंद्र सरकार अधिसूचना जारी करेगी और नए प्रावधान प्रभावी हो जाएंगे।
The above story first appeared on cgtop36.com on Jul 28, 2026 07:55 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website cgtop36.com�.

