नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के ‘संसद मार्च’ के दौरान एक नया विवाद सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो और तस्वीरों में दावा किया जा रहा है कि कुछ लोग सादे कपड़ों में हाथों में लाठी लेकर प्रदर्शन स्थल पर घूमते दिखाई दिए। CJP और प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि ये दिल्ली पुलिस के कर्मी थे, जिन्होंने बिना वर्दी के कार्रवाई की।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि संसद मार्च के दौरान पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इसके साथ ही आरोप लगाया गया कि कुछ पुलिसकर्मी सामान्य कपड़ों में भी मौजूद थे और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई में शामिल थे। इन आरोपों के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई।

हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों का खंडन किया है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित कई दावे भ्रामक हैं और लोगों से अपील की गई है कि बिना सत्यापन के किसी भी जानकारी पर विश्वास न करें।
These fake Delhi Police thugs, in collusion with the police, are beating students in front of the media.@rashtrapatibhvn @SupremeCourtIND @ccoi_1947 @UN @hrw @UN_HRC @UKParliament @EU_Commission @CIJ_ICJ @OIC_OCI @SaarcSec @AP @BBCNews @cnni @amnesty @OCCRP @UNDP https://t.co/j9f3kvXuRC
— Sharma AnoopKumar (@SharmaAnoopK) July 21, 2026
इस बीच, कुछ मीडिया रिपोर्टों में पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाने के लिए एक अलग ऑपरेशन में सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, यह कार्रवाई गोपनीय तरीके से की गई ताकि भीड़ एकत्र न हो और स्थिति नियंत्रण में रहे।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे सभी सादे कपड़ों वाले लोग पुलिसकर्मी थे या नहीं। इस संबंध में कोई स्वतंत्र आधिकारिक जांच या पुष्टि अभी तक सामने नहीं आई है। ऐसे में यह दावा फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जा रहा है, न कि स्थापित तथ्य के रूप में।

