रायपुर। छत्तीसगढ़ की लोककला और पंडवानी गायन की विश्वविख्यात हस्ती, पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई का रविवार (5 जुलाई) तड़के रायपुर स्थित AIIMS में निधन हो गया। वह 90 वर्ष की थीं और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। रविवार सुबह करीब 3:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के कला और संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
जानकारी के अनुसार, तीजन बाई की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रायपुर AIIMS में भर्ती कराया गया था, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान रविवार तड़के उनका निधन हो गया। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके पैतृक गांव ले जाने की तैयारी की जा रही है, जहां पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
तीजन बाई ने पंडवानी गायन को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। महाभारत की कथाओं को अपनी विशिष्ट शैली, दमदार आवाज और प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत करने वाली तीजन बाई ने दुनिया के कई देशों में अपनी कला का प्रदर्शन किया। उनकी प्रस्तुति ने पंडवानी जैसी लोककला को वैश्विक मंच तक पहुंचाया।
उनके कला क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और बाद में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए। उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
तीजन बाई के निधन पर विभिन्न राजनीतिक नेताओं, कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उन्हें छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान बताते हुए कहा कि उनके निधन से राज्य ने अपनी अमूल्य धरोहर खो दी है। कई कलाकारों ने सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
तीजन बाई का जीवन संघर्ष, प्रतिभा और समर्पण का अद्भुत उदाहरण रहा। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी कला को नहीं छोड़ा और अपनी मेहनत के दम पर दुनिया भर में पंडवानी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनका निधन भारतीय लोककला के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

