सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार (Photo Credits: File Image)
Siddaramaiah Resignation: कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से चल रहा नेतृत्व संघर्ष आखिरकार गुरुवार को उस मोड़ पर पहुंच गया, जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. कांग्रेस हाईकमान ने राहत की सांस ली है और अब पार्टी को उम्मीद है कि उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी. के. शिवकुमार के नेतृत्व में सत्ता का सुचारू हस्तांतरण होगा. शिवकुमार को पार्टी का समर्पित और मजबूत संगठनकर्ता माना जाता है. आइए जानते हैं 2023 से शुरू हुई इस राजनीतिक खींचतान की पूरी टाइमलाइन. Siddaramaiah Resignation: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आज दोपहर 3 बजे देंगे इस्तीफा; डीके शिवकुमार होंगे नए सीएम (Watch Video)
अप्रैल 2023: कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा था कि कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक में जिस नेता को बहुमत विधायकों का समर्थन मिलेगा, वही मुख्यमंत्री बनेगा. यहीं से सिद्धारमैया और डी. के. शिवकुमार के बीच सत्ता संघर्ष खुलकर सामने आया. शिवकुमार ने वोक्कालिगा समुदाय को साधने के लिए खुलकर अपील की थी कि अगर समुदाय उनका समर्थन करेगा, तो उनके मुख्यमंत्री बनने की संभावना मजबूत होगी. इसका असर भी दिखा और कांग्रेस ने पुराने मैसूर क्षेत्र में जनता दल-सेक्युलर (JDS) के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा दी. दूसरी तरफ सिद्धारमैया ने AHINDA वोट बैंक को कांग्रेस के पक्ष में मजबूत किया. दोनों नेताओं की रणनीति के दम पर कांग्रेस ने 136 सीटें जीतकर शानदार बहुमत हासिल किया.
13 मई 2023: चुनाव नतीजे आने के बाद सिद्धारमैया और शिवकुमार समर्थकों के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर जोरदार लॉबिंग शुरू हो गई. कई दौर की बैठकों के बाद कांग्रेस हाईकमान ने शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री पद स्वीकार करने के लिए मना लिया, जबकि सिद्धारमैया ने 20 मई 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. शिवकुमार को बेंगलुरु विकास और जल संसाधन जैसे अहम मंत्रालय दिए गए. साथ ही उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने रहने की भी अनुमति दी गई. शिवकुमार समर्थकों ने दावा किया कि दोनों नेताओं के बीच सत्ता साझा करने का समझौता हुआ है. हालांकि सिद्धारमैया ने ऐसे किसी समझौते से साफ इनकार कर दिया.
नवंबर 2024: सिद्धारमैया खेमे ने तर्क दिया कि यदि नेतृत्व परिवर्तन होता है, तो किसी दलित नेता को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए. सहकारिता मंत्री के. एन. राजन्ना, लोक निर्माण मंत्री सतीश जारकीहोली और आबकारी मंत्री आर. बी. थिम्मापुर ने इस मांग का समर्थन किया. उधर शिवकुमार समर्थकों ने कथित सत्ता साझेदारी समझौते का मुद्दा फिर उठाया और दावा किया कि शिवकुमार अंततः मुख्यमंत्री बनेंगे.
फरवरी 2025: कर्नाटक कांग्रेस में हलचल तब बढ़ गई जब सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले मंत्री के. एन. राजन्ना ने खुद को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनने के लिए तैयार बताया. यह पद उस समय शिवकुमार के पास था. इसी दौरान मंत्री सतीश जारकीहोली ने कथित तौर पर पार्टी हाईकमान से मुलाकात कर शिवकुमार को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने पर हुई पुरानी चर्चाओं की याद दिलाई.
मार्च 2025: राजन्ना ने विधानसभा में दावा किया कि 48 नेता हनी ट्रैप का शिकार हुए हैं. इस बयान से बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया. राजनीतिक गलियारों में अप्रत्यक्ष रूप से शिवकुमार की ओर इशारा किया जाने लगा. इस पर शिवकुमार ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर कोई गलत काम में शामिल नहीं है, तो उसे हनी ट्रैप से डरने की जरूरत नहीं है.
मई 2025: बढ़ते तनाव के बीच कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धारमैया और शिवकुमार को नई दिल्ली बुलाया और लंबी बैठकें कीं.
29 जून 2025: कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला बेंगलुरु पहुंचे और विधायकों से बातचीत कर सरकार के प्रदर्शन और असंतोष का आकलन किया.
अगस्त 2025: राजन्ना को कैबिनेट से बाहर कर दिया गया. उन पर राहुल गांधी के वोट चोरी संबंधी बयान के खिलाफ बोलने का आरोप था. राजन्ना ने अप्रत्यक्ष रूप से इसके पीछे शिवकुमार का हाथ बताया.
नवंबर 2025: सिद्धारमैया के ढाई साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद शिवकुमार समर्थक दिल्ली पहुंचे और खुलकर नेतृत्व परिवर्तन की मांग की. इसके जवाब में सिद्धारमैया खेमे ने फिर दलित मुख्यमंत्री का प्रस्ताव आगे बढ़ाया. पहले सिद्धारमैया ने पांच साल का कार्यकाल पूरा करने की बात कही, लेकिन बाद में कहा कि वे पार्टी हाईकमान के फैसले का पालन करेंगे.
29 अप्रैल 2026: 15 मई को शिवकुमार के 64वें जन्मदिन से पहले नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें तेज हो गईं. कांग्रेस विधायक इकबाल हुसैन ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि पार्टी हाईकमान शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद का “तोहफा” देगा.
30 अप्रैल 2026: गृह मंत्री जी परमेश्वर समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना का समर्थन किया. हालांकि खड़गे ने इस मुद्दे पर सीधा जवाब देने से बचा.
26 मई 2026: कांग्रेस हाईकमान ने फिर सिद्धारमैया और शिवकुमार को दिल्ली बुलाया. इससे नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं और तेज हो गईं. हालांकि पार्टी ने कहा कि बैठक राज्यसभा और विधान परिषद चुनाव को लेकर थी. बैठक के बाद सिद्धारमैया उदास नजर आए और बेंगलुरु लौट गए, जबकि शिवकुमार दिल्ली में ही रुके रहे.
28 मई 2026: सिद्धारमैया ने सुबह कैबिनेट मंत्रियों के साथ बैठक की और बाद में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया. इसके बाद उन्होंने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल के सहयोगी को अपना इस्तीफा सौंप दिया.

