लखनऊ: उत्तर प्रदेश के राज्यानुदानित मदरसों में टीचरों की सैलरी की अवैध निकासी के लिए फर्जी बायोमेट्रिक अटेंडेंस लगाने का मामला सामने आया है. जौनपुर के मदरसा अबरे रहमत मझगवा में प्रबंधक के चार बेटों के अंगूठों के निशान लगाकर टीचरों की फर्जी हाजिरी दर्ज की गई और वेतन निकाला गया था. अब बाराबंकी के मदरसों से भी इसी तरह का मामला सामने आया है.
आजतक को एक वीडियो मिला है, जिसमें कथित तौर पर अनुपस्थित शिक्षकों को प्लास्टिक कार्ड के जरिए प्रेजेंट दिखाया जा रहा है. आरोप है कि विभागीय निरीक्षण की कमी और अटेंडेंस मशीनों को ऑनलाइन फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम से न जोड़ने की वजह से ये घोटाला लगातार जारी है.
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे मदरसों से कार्ड के जरिए फर्जी अटेंडेंस लग रही है. इस खुलासे के बाद सरकारी अधिकारियों ने जांच की बात कही है.
जानकारी के मुताबिक, बाराबंकी का मदरसा इस्लामिया स्कूल मैलारेगंज है जिसमें टीचर दो दर्जन लगभग टीचर है और सभी टीचरों की उपस्थित बायोमेट्रिक (थंब इंप्रेशन के जरिए) है. लेकिन इसमें एडमिन कंट्रोल नहीं है और ये ऑनलाइन भी नहीं है. इसके बाद इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कई मदरसा के कर्मचारी जो है वो टीचरों की अटेंडेंस कार्ड के जरिए बराबर थंब इंप्रेशन की जगह लगा रहे हैं. इससे कि उनका रिकॉर्ड मेंटेन कर सकें.
इस वीडियो के सामने आने के बाद बायोमेट्रिक अटेंडेंस की पोल खुलती नजर आ रही है. बायोमेट्रिक अटेंडेंस के मामले में हाईकोर्ट ने ऑर्डर किया था कि सभी मदरसों में ऑनलाइन हाजिरी लगे. कमेटी भी बनी थी जिसने सभी मदरसों में ऑनलाइन ऑथेंटिकेशन का निर्देश दिया था. लेकिन इसके बाजबूद ये सिर्फ फॉर्मेलिटी के लिए डिब्बे पर अटेंडेंस लगा रहे हैं.
बायोमेट्रिक अटेंडेंस के चलते इसमें सभी को फिंगरप्रिंट लगाना होता है, इसके बाद इसकी डिटेल निकालकर एक प्लेन शीट पर इसको प्रिंट करके सरकार को भेज देते है कि इतने शिक्षक आए हैं.
शमशुद हूला खान, 10 साल तक ब्रिटेन में रहने के बावजूद मदरसे से वेतन भत्ते और वीआरएस लेकर पेंशन लेते रहे. जबकि मदरसे में वीआरएस नहीं है जिसका खुलासा एटीएस जांच में हुआ है. कुशीनगर, मदरसा प्रबंधन की बेटी तालिमुनिशा अपने पिता के मदरसे में टीचर बन गईं. उसके बाद दुबई में रहते हुए दो महीने तक फर्जी अटेंडेंस से वेतन भत्ते लेती रहीं.
जौनपुर के मदरसे अबरे रहमत मझगांव के प्रबंधक बाबर कुरैशी के बेटे के अंगूठे से चार शिक्षकों की फर्जी हाजिरी दर्ज की जा रही थी. जिसके बाद डायरेक्टर अल्पसंख्यक ने जांच बैठाई और इसकी जांच अभी भी जारी है.
यूपी के ज्वाइंट डायरेक्टर सोन कुमार के मुताबिक, हर मदरसे में बायोमेट्रिक हजारी होना जरूरी है. इसकी शीट बनाकर जिला स्तर पर अल्पसंख्यक अधिकारी करता है और उसके बाद सैलेरी दी जाती है.

