Korba. कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र में एक 28 वर्षीय युवक ने परफ्यूम पीने के बाद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। युवक विद्यासागर मिस्त्री की यह घटना परिवार और समाज के लिए बड़ा सदमा है। परिवार के अनुसार युवक पिछले कुछ समय से मानसिक रूप से परेशान था और उसे जादू-टोना का भय सताता रहा। जानकारी के अनुसार, विद्यासागर मिस्त्री कटघोरा का निवासी था और किसी निजी संस्थान में कार्यरत था। उसकी शादी वर्ष 2025 में हुई थी और उसकी पत्नी वर्तमान में सात माह की गर्भवती है। सोमवार, 5 जनवरी को जब विद्यासागर घर लौटे, उन्होंने छोटे भाई से परफ्यूम मांगा, जिसे वह ऑनलाइन मंगवा चुके थे। विद्यासागर ने परफ्यूम का सेवन किया और फिर अपने कमरे में जाकर फांसी लगा ली।
थोड़ी देर बाद परिजन जब उसे देखने गए, तो वह फांसी पर लटका मिला। तत्काल उसे नीचे उतारकर कटघोरा सरकारी अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उसे जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया, जहां चार दिन के इलाज के बाद उसकी मृत्यु हो गई। परिजन और बड़े भाई बजरंग सिह उइके ने बताया कि विद्यासागर स्वभाव से शांत और शालीन व्यक्ति था। हालांकि कभी-कभी वह शराब का सेवन करता था। पिछले कुछ दिनों से उसकी मानसिक स्थिति अस्थिर थी और वह बार-बार परेशान दिखता था। परिवार का कहना है कि वह जादू-टोने के डर से परेशान था और यही कारण है कि उसने आत्महत्या का कदम उठाया।
कटघोरा थाना पुलिस ने मामले की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचकर मृतक के परिजनों से बयान दर्ज किए। मौके से परफ्यूम की खाली शीशी बरामद हुई, जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि उसने परफ्यूम पीकर यह कदम उठाया। पुलिस ने इस मामले में प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है और डायरी संबंधित थाने को भेज दी गई है। जिला अस्पताल चौकी प्रभारी सुरेश मणि सोनवानी ने बताया कि मामले की जांच जारी है और परिजनों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आत्महत्या की सही वजह का पता लगाने के लिए और अधिक गहन जांच की जा रही है।
इस घटना ने स्थानीय समुदाय में चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि परिजन और कुछ ग्रामीण जादू-टोने के प्रभाव में इस कदम के पीछे का कारण मान रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि जादू-टोना केवल अंधविश्वास है और किसी की मौत का कारण नहीं बन सकता। डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि समाज में फैले अंधविश्वास और जादू टोने का डर मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। कई लोग मानसिक रूप से परेशान होकर तनाव और अवसाद की स्थिति में आत्महत्या जैसी कड़ी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि मानसिक स्वास्थ्य के मामलों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं और मानसिक परेशानी होने पर डॉक्टर या मनोवैज्ञानिक की मदद लें।
यह घटना इस बात को भी उजागर करती है कि मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक समर्थन की कमी युवा और मध्य आयु वर्ग के लोगों के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है। विद्यासागर की पत्नी सात माह की गर्भवती है, जिससे परिवार को भावनात्मक और सामाजिक तौर पर भारी नुकसान हुआ है। परिजन और स्थानीय लोग इस घटना से गहरा सदमे में हैं और प्रशासन से मृतक के मानसिक स्वास्थ्य और परिवार की सुरक्षा के लिए कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। पुलिस और स्थानीय प्रशासन इस मामले की गहन जांच कर रहे हैं और भविष्य में ऐसे घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर विचार कर रहे हैं।

