Delhi दिल्ली: WHO ग्लोबल समिट ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन का समापन समारोह आयोजित किया जाएगा। इस समिट का आयोजन इस वर्ष ‘Restoring balance: The science and practice of health and well-being’ विषय के तहत हुआ, जिसमें स्वास्थ्य और वेल-बीइंग के क्षेत्र में परंपरागत चिकित्सा के महत्व पर व्यापक चर्चा हुई। समिट में देश-विदेश के विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और नीति निर्माताओं ने परंपरागत चिकित्सा के विज्ञान और अभ्यास को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ जोड़ने के तरीकों पर विचार साझा किए। इस आयोजन ने वैश्विक स्वास्थ्य और आयुष क्षेत्र में नए दृष्टिकोण विकसित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।
समापन समारोह के दौरान आयुष क्षेत्र से जुड़ी कई नई पहलें भी लॉन्च की जाएंगी। ये पहलें न केवल आयुष प्रणाली को मजबूत करेंगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवा के व्यापक और समग्र दृष्टिकोण को बढ़ावा देंगी। कार्यक्रम के दौरान डिजिटल हेल्थ, अनुसंधान, नवाचार और स्वास्थ्य प्रबंधन के क्षेत्र में परंपरागत चिकित्सा के महत्व को भी उजागर किया जाएगा। आयुष मंत्रालय ने बताया कि इस समिट में योग, आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी प्रणालियों को आधुनिक चिकित्सा के साथ समन्वित करने पर विशेष जोर दिया गया। विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए और यह समझाने का प्रयास किया कि कैसे परंपरागत चिकित्सा आधुनिक जीवन शैली से जुड़े रोगों और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान प्रदान कर सकती है।
इस समिट के दौरान स्वास्थ्य और वेल-बीइंग के क्षेत्र में नई तकनीक, रिसर्च प्रोजेक्ट्स और नीति आधारित सुझाव पेश किए गए। समिट के आयोजकों का कहना है कि इस कार्यक्रम से दुनिया भर के स्वास्थ्य पेशेवरों और शोधकर्ताओं के बीच ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान बढ़ा है। समापन समारोह में वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य और वेल-बीइंग के लिए नई दिशा तय करने वाले पहलुओं पर प्रकाश डाला जाएगा। इसके अलावा, आयुष क्षेत्र में अनुसंधान, शिक्षा और जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष कार्यक्रमों की घोषणा की जाएगी। यह पहलें आयुष प्रणाली को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने में सहायक साबित होंगी।
WHO ग्लोबल समिट ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन का उद्देश्य केवल परंपरागत चिकित्सा की प्रथाओं को बढ़ावा देना ही नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य और जीवन शैली के संतुलन को बहाल करने के लिए विज्ञान आधारित दृष्टिकोण को भी साझा करना है। इस वर्ष की थीम ‘Restoring balance’ इस बात पर जोर देती है कि स्वस्थ जीवन के लिए वैज्ञानिक और पारंपरिक दृष्टिकोण का संयोजन आवश्यक है। समापन समारोह में उपस्थित प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों का मानना है कि आयुष क्षेत्र में नई पहलें न केवल स्वास्थ्य देखभाल की पहुंच बढ़ाएंगी, बल्कि रोजगार और शिक्षा के अवसर भी प्रदान करेंगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म और नवाचार के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
इस समिट के समापन के साथ ही आयुष मंत्रालय की ओर से कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग कार्यक्रमों की शुरुआत भी होगी। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य और वेल-बीइंग को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को मजबूत करना है। आयुष क्षेत्र की नई पहलें, आधुनिक चिकित्सा के साथ परंपरागत चिकित्सा का समन्वय, डिजिटल स्वास्थ्य और वैश्विक सहयोग इस समापन समारोह के प्रमुख आकर्षण होंगे। विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं का मानना है कि यह समिट भविष्य में स्वास्थ्य क्षेत्र में नई प्रगति और नवाचार के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। समापन समारोह और नई पहलें न केवल भारत में बल्कि पूरे विश्व में परंपरागत चिकित्सा के महत्व को उजागर करेंगी और स्वास्थ्य और वेल-बीइंग के क्षेत्र में सतत विकास के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेंगी।

