शिमला। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में वर्तमान राज्य सरकार ने बाल्यावस्था देखभाल और बच्चों के समग्र विकास को केंद्र में रखकर अनेक नीतिगत कदम उठाए हैं। पोषण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समावेशी विकास पर विशेष बल देते हुए सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि प्रदेश में प्रत्येक बच्चे का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो और उन्हें आगे बढऩे के समान अवसर मिले। नौनिहालों की पोषण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सरकार ने अनेक ठोस कदम उठाए हैं, ताकि बच्चों का संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सके। प्रदेश भर में संचालित हो रहे 18,925 आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के मजबूत भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। इन केंद्रों द्वारा छह वर्ष तक की आयु के बच्चों के स्वास्थ्य मानकों का मूल्यांकन किया जाता है, ताकि बच्चे का समुचित शारीरिक और मानसिक विकास सुनिश्चित किया जा सके। इस वित्त वर्ष में आंगनबाड़ी सेवा योजना के तहत 113 करोड़ रुपए व्यय किए जा चुके हैं। वर्तमान वित्त वर्ष में विशेष पोषाहार कार्यक्रम के तहत 1516.09 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं।
आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बाल्यकाल देखभाल के साथ औपचारिक स्कूली शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार ने सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को आंगनबाड़ी सह-स्कूल घोषित किया है। इससे उनकी प्रारंभिक शिक्षा की मजबूत नींव तैयार होगी। प्रदेश के लिए स्वीकृत 1030 सक्षम आंगनबाड़ी केंद्रों में से जिला चंबा के लिए 100 आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों में स्तरोन्नत करने की प्रक्रिया जारी है। राज्य के सभी जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी व सुपरवाइजर को स्टेट लेवल मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सभी सरकारी स्कूलों के बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाने के लिए मुख्यमंत्री बाल पोषण आहार योजना शुरू की है। योजना के तहत राज्य के 15,181 सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे 5.34 लाख से अधिक छात्रों को पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाया जा रहा है। बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्कूलों में किचन गार्डन पहल को सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है।

