Durg. दुर्ग। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग ने एक बार फिर मानवीय संवेदना, संवैधानिक मूल्यों और बंदियों के अधिकारों के संरक्षण की दिशा में अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। केन्द्रीय जेल दुर्ग के महिला प्रकोष्ठ में हत्या के अपराध में निरुद्ध एक महिला बंदी के गर्भवती होने की सूचना मिलते ही प्राधिकरण ने संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए त्वरित एवं प्रभावी कदम उठाए। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के मार्गदर्शन में इस पूरे प्रकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। प्रारंभिक अवस्था से ही महिला बंदी के स्वास्थ्य, गरिमा और मातृत्व अधिकारों की रक्षा को केंद्र में रखते हुए विस्तृत कार्ययोजना बनाई गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सतत निगरानी में महिला बंदी का नियमित चिकित्सकीय परीक्षण सुनिश्चित किया गया।
प्राधिकरण द्वारा विशेषज्ञ चिकित्सकों से समय-समय पर परामर्श कराया गया। गर्भावस्था से जुड़ी आवश्यक जांच, दवाइयों की उपलब्धता और विशेष चिकित्सकीय देखभाल की व्यवस्था की गई, ताकि किसी भी प्रकार की जटिलता से बचा जा सके। इसके साथ ही जेल प्रशासन से समन्वय स्थापित कर महिला बंदी को पौष्टिक एवं संतुलित आहार उपलब्ध कराया गया, जिससे गर्भस्थ शिशु और माता दोनों का समुचित पोषण सुनिश्चित हो सके। पूरी गर्भावस्था अवधि के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने महिला बंदी को केवल चिकित्सकीय ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संबल भी प्रदान किया। उसे यह विश्वास दिलाया गया कि कानून और व्यवस्था के दायरे में रहते हुए उसके स्वास्थ्य, सम्मान और मातृत्व अधिकारों का पूर्ण संरक्षण किया जाएगा। इस मानवीय दृष्टिकोण से महिला बंदी में आत्मविश्वास और सकारात्मकता बनी रही, जिसका सीधा प्रभाव उसके स्वास्थ्य पर भी देखने को मिला।
इन निरंतर प्रयासों का सकारात्मक परिणाम 31 दिसंबर 2025 को सामने आया, जब महिला बंदी ने सुरक्षित रूप से एक स्वस्थ बालक को जन्म दिया। प्रसव पूरी तरह सुरक्षित वातावरण में संपन्न हुआ। प्रसवोपरांत चिकित्सकीय परीक्षण में माता और नवजात शिशु—दोनों को पूर्णतः स्वस्थ पाया गया। वर्तमान में दोनों की नियमित देखभाल की जा रही है। यह घटना जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग की मानवीय सोच, संवैधानिक प्रतिबद्धता और बंदियों के अधिकारों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण का सशक्त उदाहरण है। यह
सक्सेस
स्टोरी यह स्पष्ट करती है कि अपराध की प्रकृति चाहे कितनी भी गंभीर क्यों न हो, प्रत्येक व्यक्ति—विशेषकर गर्भवती महिला—को स्वास्थ्य, गरिमा और मातृत्व का अधिकार सुनिश्चित करना विधिक सेवा प्राधिकरण का मूल दायित्व है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग का यह प्रयास न केवल विधिक व्यवस्था में मानवीय मूल्यों को सशक्त करता है, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणास्रोत है कि न्याय के साथ-साथ करुणा और संवेदना भी समान रूप से आवश्यक हैं।

