Shimla. शिमला। केसीसी बैंक के करोड़ों रुपए के ओटीएस घोटाले को लेकर बैंक अधिकारियों के साथ कई नेता भी ईडी के निशाने पर हैं। ईडी पता लगा रहा है कि किसके कहने पर बैंक अधिकारियों ने 24 करोड़ की छूट देकर बैंक को नुकसान पहुंचाया। ईडी की टीम मामले से जुड़े हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है। आने वाले दिनों में ईडी की जांच में बड़े खुलासे हो सकते हैं। केसीसी बैंक के करोड़ों घोटाले को लेकर ईडी ने अब राजनीतिक एंगल की भी पड़ताल शुरू कर दी है। बीते दिनों शिमला स्थित ईडी मुख्यालय में पालमपुर शाखा के मैनेजर से करीब आठ घंटे तक पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए हैं। सूत्र बताते हैं कि मैनेजर ने स्वीकार किया कि अप्रैल 2025 में कर्ज वसूली के लिए रवाना हुई बैंक टीम को एमडी के आदेश पर बीच रास्ते से वापस बुला लिया गया था।
इस खुलासे के बाद जांच का फोकस अब बैंक के शीर्ष प्रबंधन पर आ गया है। ईडी उन लिखित आदेशों की मूल प्रति जब्त करने की तैयारी में है, जिनके आधार पर रिकवरी की प्रक्रिया रोकी गई थी। एजेंसी का मानना है कि 45 करोड़ रुपए के कर्ज को महज 21 करोड़ में सेटल कर बैंक को करीब 24 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचाया गया। जांच पालमपुर स्थित एक होटल के 45 करोड़ रुपए के कर्ज को वन टाइम सेटलमेंट के तहत 21 करोड़ में निपटाने से जुड़ी है। सूत्रों के अनुसार रिकवरी टीम को वापस बुलाने का फैसला इसी कर्ज निपटारे के लिए लिया गया था। पूछताछ में यह भी सामने आया कि सरफेसी एक्ट के तहत सार्वजनिक नीलामी की प्रक्रिया अपनाने के बजाय बंद कमरे में ओटीएस को मंजूरी दी गई। कांगड़ा के एक कांग्रेस नेता का नाम भी इस प्रकरण में सामने आ रहा है। ईडी बैंक प्रबंधन और संबंधित राजनीतिक संपर्कों की कडिय़ों को खंगाल रही है।

