Balrampur. बलरामपुर। जिले में अवैध धान परिवहन और किसानों के महत्वपूर्ण दस्तावेजों के दुरुपयोग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। प्रशासन ने इस प्रकरण में सख्त रुख अपनाते हुए रामचंद्रपुर विकासखंड के ग्राम कुर्लडीह निवासी श्याम सुंदर गुप्ता के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। इस कार्रवाई से जिले में सक्रिय धान माफिया और बिचौलियों में हड़कंप मच गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बीती रात लगभग 8 बजे राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने अवैध रूप से धान का परिवहन कर रहे एक पिकअप वाहन को रोका। वाहन की तलाशी लेने पर उसमें बड़ी मात्रा में धान पाया गया। पूछताछ के दौरान वाहन चालक ने बताया कि धान ग्राम कुर्लडीह निवासी श्याम सुंदर गुप्ता के घर ले जाया जा रहा था।
संदेह गहराने पर टीम ने तत्काल उसके घर पर दबिश दी। घर की तलाशी के दौरान टीम को करीब 400 बोरी धान और 1 लाख 67 हजार 100 रुपये नकद बरामद हुए। पूछताछ में आरोपी ने नकदी को अपने छोटे भाई के व्यवसाय से जुड़ी राशि बताया, लेकिन संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाते हुए घर में मौजूद अन्य सामग्रियों की भी तलाशी ली गई। तलाशी में बड़ी संख्या में किसानों की ऋण पुस्तिकाएं, बैंक पासबुक, चेकबुक, भरे हुए और कोरे विड्रॉल फॉर्म, जमा पर्चियां, तौल पर्चियां, डायरी, बैंक रजिस्टर, टोकन पर्चियां और अन्य लेखा-जोखा से संबंधित दस्तावेज बरामद किए गए। इसके अलावा एक अलग बैग से विभिन्न किसानों के आधार कार्ड, एटीएम कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक पासबुक, चेकबुक, मोबाइल फोन और वाहन से जुड़े दस्तावेज भी मिले, जिससे मामला और गंभीर हो गया।
मौके से पिकअप वाहन क्रमांक यूपी 64 सीटी 4218 और मोटरसाइकिल क्रमांक सीजी 15 डीवाय 4601 को भी जब्त कर थाना सनावल भेजा गया है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी किसानों के बैंक खाते, चेकबुक और अन्य दस्तावेज अपने कब्जे में रखकर सीमावर्ती राज्यों से कम कीमत पर धान खरीदता था और फिर छत्तीसगढ़ के धान खरीदी केंद्रों में उसे ऊंचे दामों पर बेचकर अवैध लाभ कमाता था। जांच अधिकारियों के अनुसार, बैंक विड्रॉल पर्चियों पर पहले से किसानों के हस्ताक्षर होना बड़े पैमाने पर
वित्तीय
अनियमितता और किसानों से धोखाधड़ी की ओर इशारा करता है। यह पूरा कृत्य शासकीय नियमों के खिलाफ है और इससे न केवल शासन को राजस्व का नुकसान हो रहा था, बल्कि किसानों का आर्थिक शोषण भी किया जा रहा था। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता से भी इनकार नहीं किया जा सकता और पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि जिले में धान खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता बनाए रखने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए आगे भी ऐसी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
