Delhi दिल्ली: पुलिस की क्राइम ब्रांच ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए वाहन लोन लेकर गाड़ियां बेचने वाले बड़े गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक फर्जी आधार कार्ड बनाने वाला शामिल है। साइबर सेल की टीम ने बताया कि गिरोह के सदस्य फर्जी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और मनगढ़ंत इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) तैयार कर बैंकों से वाहन लोन हासिल करते थे। लोन मिलने के बाद आरोपी जानबूझकर किस्तें चुकाते नहीं थे, जिससे यह लोन एनपीए (Non-Performing Asset) घोषित हो जाता था। इसके बाद वाहन को दूसरे राज्यों में दोबारा रजिस्टर कराकर बेच दिया जाता था, ताकि पकड़े जाने से बचा जा सके।
क्राइम ब्रांच को 25 दिसंबर को गुप्त सूचना मिली, जिसके आधार पर तिलक नगर निवासी अमन कुमार (46) को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में सामने आया कि अमन ने राहुल कपूर, श्याम सुंदर और राय कपूर जैसे कई फर्जी नामों से बैंक खाते खुलवाए और इन खातों से वाहन लोन लेकर महंगी गाड़ियां खरीदी। इसके बाद वह गाड़ियां अलग-अलग व्यक्तियों को बेच देता था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कुल पांच महंगी गाड़ियां बरामद की हैं, जिनमें मर्सिडीज, मारुति ब्रेज़ा और महिंद्रा स्कॉर्पियो-एन शामिल हैं। जांच में यह भी सामने आया कि अलग-अलग फर्जी पहचान पत्रों पर लगी तस्वीरें एक ही व्यक्ति की थीं।
जांच को और आगे बढ़ाते हुए 8 जनवरी को नजफगढ़ निवासी धीरज उर्फ आलोक उर्फ सिद्धार्थ को भी गिरफ्तार किया गया। इस व्यक्ति ने भी अमन कुमार के साथ मिलकर फर्जी पहचान से बैंक खाते खुलवाए और वाहन लोन लेकर गाड़ियां बेचीं। साइबर सेल ने फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले साई दस्तावेज सेंटर का भी पता लगाया। इसके मालिक नरेश कुमार को गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से मोबाइल फोन, आई स्कैनर, बायोमेट्रिक स्कैनर, वेबकैम और पीवीसी कार्ड मशीन बरामद की गई। पुलिस ने मामले में क्राइम ब्रांच थाने में मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस का कहना है कि इस गिरोह में और लोग भी शामिल हो सकते हैं और उनकी पहचान की जा रही है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि गिरोह की योजना बेहद संगठित और पेशेवर तरीके से बनाई गई थी, जिसमें फर्जी दस्तावेज तैयार करना और वाहन बेचने की रणनीति शामिल थी। इस मामले से यह स्पष्ट हुआ कि साइबर और फर्जी दस्तावेजों के जरिए वाहन लोन ठगी करने वाले गिरोहों पर पुलिस का कड़ा नजर है और ऐसे अपराधियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई की जा रही है।

