Ghaziabad गाजियाबाद: जिले के मोदीनगर स्थित केईजीएन ऑटोमोबाइल फैक्ट्री में सोमवार को एक भयानक हादसा हुआ, जिसमें चार मजदूरों पर लगभग 20 टन वजनी मशीन गिर गई। इस हादसे में दो मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बाकी दो गंभीर रूप से घायल हैं और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। जानकारी के मुताबिक, हादसा उस समय हुआ जब फैक्ट्री में लगी क्रेन 20 टन की मशीन को उठाकर दूसरी जगह ले जा रही थी। इसी दौरान क्रेन का हुक टूट गया और मशीन नीचे गिर गई। मशीन के नीचे दबे चार मजदूरों में से दो को बाहर निकालकर तुरंत अस्पताल भेजा गया, जहां उनका इलाज जारी है। वहीं, दो मजदूरों – आजाद और शाहिद अंसारी – की मौत हो गई। मृतक मजदूरों के शरीर बुरी तरह कुचल गए थे। साथी मजदूरों ने उनके शवों को जमीन से खुरच-खुरच कर निकालना पड़ा।
हादसे के बाद फैक्ट्री में भारी आक्रोश फैल गया। मृतक मजदूरों के परिजन फैक्ट्री परिसर में जमा होकर प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे और शवों को वहीं रखकर हंगामा किया। सूचना मिलने पर निवाड़ी थाने की पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची और परिजनों को शांत कराया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। कंपनी ने हादसे के बाद मृतक मजदूरों के परिजनों को 20-20 लाख रुपए मुआवजे का ऐलान किया। मुआवजे की घोषणा के बाद परिजन शांत हुए। फैक्ट्री में ऑटो पार्ट्स बनाने का काम किया जाता है और यहां करीब 90 कर्मचारी काम करते हैं।
हादसे की वजह क्रेन की बेल्ट में कमजोरी बताई जा रही है। मजदूरों का कहना है कि बेल्ट पहले से कमजोर थी और इसे बदलने की मांग उन्होंने फैक्ट्री प्रबंधन से की थी, लेकिन प्रबंधन ने इसे नजरअंदाज कर दिया। मोदीनगर ACP अमित सक्सेना ने कहा कि मामले में शिकायत मिलने पर रिपोर्ट दर्ज कर कंपनी प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हादसे के समय मशीन को उठाने के दौरान क्रेन का हुक टूटने से यह हादसा हुआ। मजदूर अयान और सलीम गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। फैक्ट्री में सुरक्षा नियमों का पालन न होने और कमजोर उपकरण के इस्तेमाल के कारण यह दुर्घटना हुई।
स्थानीय लोग और मजदूर इस घटना से सदमे में हैं और उन्होंने फैक्ट्री प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। पुलिस ने कंपनी प्रबंधन से बयान दर्ज किए हैं और आगे की जांच जारी है। हादसे ने कार्यस्थल सुरक्षा के नियमों और कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना से एक बार फिर यह स्पष्ट हो गया है कि भारी मशीनरी और उद्योगों में सुरक्षा मानकों का पालन न होने से गंभीर हादसे हो सकते हैं। प्रशासन और पुलिस की निगरानी के बावजूद सुरक्षा उपायों की उपेक्षा ने मजदूरों की जान ले ली।

