Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल के निर्वाचित सदस्यों की होने वाली सामान्य सभा की बैठक पर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने रोक लगा दी है। यह विवाद चुनाव में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की आशंकाओं के कारण उत्पन्न हुआ है। बीसीआई ने अपनी ओर से जांच के लिए हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है, जबकि निर्वाचित सदस्यों ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है।
निर्वाचित प्रतिनिधियों की ओर से दायर याचिका पर आज हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के चुनाव को केवल अफवाह या अनिश्चित जानकारी के आधार पर रोका नहीं जाना चाहिए। इसके लिए बीसीआई को ठोस कारण प्रस्तुत करना आवश्यक है। बीसीआई की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर पिटिशन दायर कर दी है। हाई कोर्ट ने बीसीआई को अपना जवाब पेश करने के लिए 14 जनवरी तक का समय दिया है। इस बीच निर्वाचित सदस्यों ने अपना पक्ष रखते हुए चुनाव प्रक्रिया को स्थगित किए जाने के फैसले को चुनौती दी है।
भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप
बीसीआई के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने चुनाव के दौरान लग्जरी कार और नकदी वितरण की शिकायतों को आधार बनाते हुए सामान्य सभा की बैठक स्थगित कर दी। साथ ही चुनाव में हार्स ट्रेडिंग और भ्रष्टाचार की आशंका के मद्देनजर तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। इस समिति को 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। बीसीआई का दावा है कि विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ निर्वाचित सदस्य अवैध और अनैतिक तरीकों से पदाधिकारियों के चुनाव में शामिल हुए हैं। इसमें चार पहिया वाहन और नकदी के रूप में मतदाताओं को प्रलोभन देने का आरोप भी शामिल है। ऐसे कृत्यों के कारण चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली खतरे में पड़ सकती है। चेयरमैन के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि वकालत न करने वाले अधिवक्ताओं को किसी भी पद या कार्यालय से दूर रखा जाएगा। यह निर्देश अधिनियम 1961 के तहत जारी किया गया है ताकि चुनाव की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।
निवर्तमान और निर्वाचित सदस्यों की प्रतिक्रिया
निर्वाचित सदस्यों में बीपी सिंह, जेके त्रिपाठी, अशोक तिवारी, फैजल रिजवी, संतोष वर्मा, चंद्र प्रकाश जांगड़े सहित कुल 19 सदस्य शामिल हैं। उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर बीसीआई के आदेश को चुनौती दी है। उनका तर्क है कि चुनाव में किसी भी तरह के आरोप की सच्चाई स्थापित नहीं हुई और सामान्य सभा को रोकने का निर्णय लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में चुनाव अफवाहों के आधार पर नहीं रोके जा सकते। डिवीजन बेंच ने बीसीआई को जवाब पेश करने के लिए दो दिन का समय दिया और 14 जनवरी को अगली सुनवाई तय की गई है।
जांच समिति और आगे की प्रक्रिया
जांच समिति में एक रिटायर्ड हाई कोर्ट जज और दो वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं। समिति का काम चुनाव में लग्जरी वाहन, नकदी वितरण और हार्स ट्रेडिंग के आरोपों की जांच करना है। समिति को 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट बार काउंसिल ऑफ इंडिया के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी। रिपोर्ट के बाद ही चुनाव की तिथि तय की जाएगी और सामान्य सभा की बैठक के आगे का निर्णय लिया जाएगा। BCI चेयरमैन ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और बार काउंसिल की विश्वसनीयता, निष्ठा और लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली पर असर डालता है। इसलिए निष्पक्ष, स्वतंत्र और गहन जांच आवश्यक है। चुनाव में भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने वालों को चुनाव लड़ने या पद धारण करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
पिछले चुनावों में भी धांधली के आरोप
छत्तीसगढ़ बार काउंसिल के पिछले चुनावों में भी धांधली के गंभीर आरोप लगे थे। ऐसे मामलों ने संस्थागत सतर्कता और चुनाव प्रक्रिया की गहन जांच की आवश्यकता को बढ़ा दिया है। बार काउंसिल के सचिव अमित कुमार वर्मा ने निर्वाचित सदस्यों को पत्र लिखकर सामान्य सभा की बैठक स्थगित करने की जानकारी दी। BCI ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और स्व-नियमन की सुनिश्चितता के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। जांच समिति रिपोर्ट पेश करने के बाद ही बार काउंसिल की सामान्य सभा और पदाधिकारियों के चुनाव की अगली तिथि घोषित की जाएगी।

