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स्मृति शेष – हंसते हसंते शहीद हो गए थे राम प्रसाद बिस्मिल, 121वां जन्मदिवस आज

क्रांतिकारी, शायर, लेखक, इतिहासकार, साहित्यकार राम प्रसाद बिस्मिल का आज 121वां जन्मदिवस है। राम प्रसाद बिस्मिल ने सिर्फ 11 साल की उम्र में ही स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेना शुरू कर दिया था। उनका जन्म 11 जून 1897 को शाहजहांपुर में हुआ था, बचपन में राम प्रसाद बिस्मिल आर्यसमाज से प्रेरित थे और उसके बाद वे देश की आजादी के लिए काम करने लगे।

जानकारी के मुताबिक बिस्मिल मातृवेदी संस्था से भी जुड़े थे, इस संस्था में रहते हुए उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई के लिए काफी हथियार जमा किया, लेकिन अंग्रेजी सेना को इसकी भनक लग गई थी और अंग्रेजों ने हमला बोलकर काफी हथियार बरामद कर लिए।

इस घटना को ही मैनपुरी षड़यंत्र के नाम से भी जाना जाता है. काकोरी कांड को अंजाम देने के बाद बिस्मिल को गिरफ्तार कर लिया गया और मुकदमा चलाया गया। काकोरी कांड में शामिल होने के कारण से अंग्रेजों ने राम प्रसाद बिस्मिल को 19 दिसंबर 1927 को फांसी के फंदे पर लटका दिया था।

बिस्मिल कविताओं और शायरी लिखने के काफी शौकीन थे. फांसी के फंदे पर भी बिस्मिल ने ‘सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है’ के कुछ शेर पढ़े थे। ये शेर पटना के अजीमाबाद के मशहूर शायर बिस्मिल अजीमाबादी की रचना थी. पर जनमानस में इस रचना की पहचान राम प्रसाद बिस्मिल के नाम बन गई।

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