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पीएम मोदी की दो टूक, कश्मीर पर तीसरे की आवश्यकता नहीं

कश्मीर मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बातचीत के नतीजों को कूटनीतिक जानकार भारत की विदेश नीति के हित में बता रहे हैं। उनका कहना है कि मोदी की भरोसे से भरी भाव भंगिमा से स्पष्ट है कि वह कश्मीर मुद्दे पर अमेरिका सहित अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का समर्थन हासिल करने में सफल रहे हैं। खासतौर पर ट्रंप की मौजूदगी में उनका यह कहना कि द्विपक्षीय मुद्दे पर वे किसी तीसरे देश को कष्ट नहीं देना चाहते, भारत का कश्मीर मुद्दे पर कड़ा रुख जाहिर करता है।

बता दें कि भारत ने बार-बार स्पष्ट किया है कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 समाप्त करना उसका आंतरिक मामला है। इसमें तीसरे देश के दखल की कोई गुंजाइश नहीं है। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी माना कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मसला है और दोनों मुल्क इसका समाधान कर सकते हैं।

निजी केमिस्ट्री का मिल रहा लाभ

-जानकार मानते हैं कि मोदी की दुनिया के तमाम देशों के नेताओं के साथ निजी केमिस्ट्री कूटनीतिक रूप से भारत के लिए मददगार साबित हो रही है। वह ट्रंप को यह जताने में कामयाब रहे हैं कि दोनों देशों के मजबूत सामरिक और व्यापारिक रिश्तों में पाकिस्तान से नूराकुश्ती आड़े नहीं आना चाहिए। पाकिस्तान अनावश्यक रूप से कश्मीर में दखल की कोशिश कर रहा है, जबकि भारत के फैसले से किसी भी तरह से भौगोलिक सीमा में बदलाव नहीं हुआ है।

सामरिक-व्यापारिक साझेदारी पर निगाह

कूटनीतिक जानकार यह भी मानते हैं कि आने वाले दिनों में भारत और अमेरिका के बीच कई अहम सामरिक समझौते होने हैं। भारत प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों को मिलकर अहम भूमिका निभानी है। व्यापार की होड़ में भी अमेरिका भारत में अपने हित तलाश रहा है। इसलिए कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ पूरी तरह खड़ा होना अमेरिका के अपने हित में भी नहीं है।

रुख से सतर्क रहने की सलाह

हालांकि, जानकार ट्रंप के रुख से सतर्क रहने की भी सलाह दे रहे हैं। माना जा रहा है कि अमेरिका अपने हितों के मद्देनजर संतुलन की रणनीति पर चल रहा है, लेकिन कश्मीर मसले पर भारत को सावधानी से नजर रखते हुए अपनी कूटनीतिक कवायद जारी रखने की जरूरत होगी। कूटनीतिक जानकार जी पार्थ सारथी के मुताबिक ट्रंप ने जो कहा, उस पर पूरी तरह से भरोसा न करें। ट्रंप जब तक समझते हैं कि उन्हें एक बार फिर जीतने में कौन मदद करेगा, उसके हिसाब से रणनीति तय कर सकते हैं। पहले उन्हें लग रहा था कि अफगानिस्तान में पाकिस्तान उन्हें मदद करेगा, लेकिन शायद अब उन्हें लगता है कि यह सहयोग सीमित है। दो हफ्ते बाद क्या होगा, कह नहीं सकते।

आर्थिक बदहाली से पाक पर दबाव

पार्थ सारथी ने कहा, फिलहाल ट्रंप को लग रहा होगा कि पाकिस्तान कोआर्थिक मोर्चे पर दबाया जा सकता है। उसकी आर्थिक स्थिति बदहाल है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रो कोष (आईएमएफ) के बिना पाकिस्तान चल नहीं सकता। एफएटीएफ में भी उसे दबाया जा सकता है। ट्रंप को उनके रक्षा व विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट भी भारत के साथ खड़ा होने को मजबूर कर रही है। फिलहाल ट्रंप-मोदी की मुलाकात में जो कुछ हुआ, वह हमारे लिए सकारात्मक है।

पीएम मोदी और ट्रंप की बैठक में क्या हुआ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में दो टूक कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दे द्विपक्षीय हैं। इनमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है। इस मुद्दे पर कई बार मध्यस्थता की पेशकश कर चुके ट्रंप ने मोदी की बात से सहमति जताते हुए कहा कि भारत तथा पाकिस्तान अपने मुद्दे आपस में सुलझा लेंगे।

जी-7 देशों के शिखर सम्मेलन के इतर ट्रंप के साथ साझा पत्रकार वार्ता में मोदी ने कहा, भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दे द्विपक्षीय हैं। हम दुनिया के किसी भी देश को कष्ट नहीं देते हैं। मुझे विश्वास है कि भारत और पाकिस्तान जो वर्ष 1947 से पहले एक ही थे, मिलकर सभी मुद्दों पर चर्चा और उनका समाधान कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के चुनाव जीतने के समय उन्होंने टेलीफोन पर उनसे कहा था कि पाकिस्तान और भारत दोनों को गरीबी, अशिक्षा और बीमारी से लड़ना है। दोनों देश आवाम की भलाई के लिए मिलकर काम करें।

इस पर राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उन्होंने और मोदी ने बीती रात कश्मीर के बारे में बात की और उन्हें लगता है कि भारत और पाकिस्तान इसका समाधान कर सकते हैं। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत ने हाल में जम्मू-कश्मीर को दिया गया विशेष दर्जा वापस लेकर उसे दो केंद्र शासित क्षेत्रों में विभाजित कर दिया था।

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