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श्रीलंका में हाई अलर्ट के बाद भी नहीं थम रहे बम धमाके, तीन बम धमाके हुवे बीते दिन

श्रीलंका में ईस्टर के मौके पर हुए बम ब्लास्ट के बाद हालात अभी तक सामान्य नहीं हुए हैं. सुरक्षा एजेंसियों के हाई अलर्ट के बाद भी श्रीलंका में बम ब्लास्ट की खबरें सामने आ रही हैं. शुक्रवार को श्रीलंका के कलमुनाई सिटी में सेंडामारुडू इलाके में तीन बमों के धमाके हुए।

सामान हुवे बरामद

हालांकि इस बम विस्फोट में किसी के हताहत होने की कोई खबर सामने नहीं आई है.यह हादसा तब हुआ जब सुरक्षाबल ईस्टर के मौके पर हुए बम ब्लास्ट में संदिग्धों के खिलाफ सर्च अभियान चला रहे थे. सुरक्षाबलों के सर्च ऑपरेशन में इस्लामिक स्टेट की वर्दी, झंडे और 150 जेलिगनाइट स्टिक बरामद किए गए हैं।

ड्रोन कैमरे भी बरामद

सुरक्षाबलों ने रेड्स के दौरान ड्रोन कैमरे भी बरामद किए हैं. इस संबंध में 7 लोगों को हिरासत में भी लिया गया है.गुरुवार सुबह भी श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से 40 किमी. दूर बम धमाके की आवाज़ सुनाई दी. हालांकि, धमाका किस तरह का है इस पर अभी पुलिस का आधिकारिक बयान आना बाकी है।

8 धमाके हुवे थे

आपको बता दें कि 21 अप्रैल को ईस्टर के मौके पर श्रीलंका में कई जगहों पर 8 धमाके हुए थे, तभी से वहां पर सुरक्षा बढ़ाई गई हैं. लेकिन अब एक बार फिर धमाके की खबर हैरान करने वाली है।

बता दें कि आतंकी हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट (IS) ने ली है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक श्रीलंका ब्लास्ट में मरने वालों की संख्या 253 तक पहुंच गई है. जबकि घायलों की संख्या अब भी सैकड़ों में है।

श्रीलंका में हमले के बाद से सुरक्षा बढ़ाई गई है, अमेरिका की एजेंसी एफबीआई भी जांच में मदद कर रही है. अभी तक करीब 58 संदिग्धों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है और पूछताछ जारी है. पुलिस को लगातार संदिग्ध मोटरसाइकिल, फोन और सामान बरामद हो रहे हैं।

बताया जा रहा है कि अभी भी कई संदिग्ध सामग्री से लैस देश में घूम रहे हैं. वहीं, कोलंबो के होटल शांगरिला में हुए धमाके के पीछे नेशनल तौहीद जमात का हाथ बताया जा रहा है. जिसका मास्टरमाइंड ज़हरान हाशिम था. हाशिम ने ही होटल में घुस खुद को उड़ा लिया था।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह डॉ. ज़ाकिर नाईक से प्रभावित था. गौरतलब है कि श्रीलंका में आतंकी हमले से पहले भारत ने अलर्ट भेजा था. श्रीलंका के रक्षा मंत्री ने भी बुधवार को बयान दिया था कि भारत ने जो जानकारी भेजी थी, वह कभी हमारे प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे तक नहीं पहुंच पाईं. ये इनपुट राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना को मिला था, जिसपर उन्होंने जांच करने का भरोसा जताया था. लेकिन प्रधानमंत्री और रक्षा एजेंसियों को इनके बारे में सूचित नहीं किया।

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