मनोरंजन

सिनेमाघरों में रिलीज हुई रोमांस और कॉमेडी से भरपूर फिल्म ‘लुका छुपी’

बॉलीवुड एक्टर कार्तिक आर्यन और कृति सेनन की फिल्म ‘लुका छुपी’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। ये फिल्म दो अलग सोच रखने वाले कपल की है। आज का यूथ अपने जीवनसाथी को जांच-परख कर चुनना चाहता है, जहां गुड्डू (कार्तिक आर्यन) का मानना है कि अगर प्यार है तो शादी क्यों न कर ली जाए, जबकि रश्मि (कृति सेनन) का मानना है कि भले प्यार हो, मगर लिव-इन में रह कर एक-दूसरे को आजमाने में क्या हर्ज है। ऐसी ही दो अलग सोच रखनेवाली जोड़ी को निर्देशक लक्ष्मण उतेकर ने फिल्म में बुन दिया है।

कहानी

फिल्म की कहानी मथुरा शहर से शुरू होती है, जहां गुड्डू एक लोकल केबल चैनल का रिपोर्टर है। रश्मि एक राजनीतिक दल और संस्कृति ग्रुप के सर्वेसर्वा त्रिवेदी जी (विनय पाठक) की इकलौती बेटी है, जो दिल्ली से मीडिया की पढ़ाई करके आईं है। इंटर्नशिप के तहत वह गुड्डू के लोकल केबल चैनल से जुड़ती है, जहां दोनों में प्यार हो जाता है। मगर कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब रश्मि गुड्डू के साथ लिव-इन में रह कर उसे परखना चाहती है। मुद्दा यह है कि रश्मि के पिता त्रिवेदी जी एक्टर नाजिम खान के लिव-इन का कड़ा विरोध कर उसकी फिल्मों को बैन करवा चुके हैं। अब उनके पार्टी सदस्यों का कहर मथुरा के लव कपल्स पर बरस रहा है। उसकी पार्टी के मेंबर्स प्रेमी जोड़ों को देखते ही उनका मुंह काला करने से नहीं चूकते। ऐसे में गुड्डू का दोस्त अब्बास (अपारशक्ति खुराना) जुगाड़ लगाता है कि चैनल के लिए की जानेवाली एक स्टोरी के लिए वे लोग ग्वालियर जा रहे हैं, तो 20 दिन के इस असाइनमेंट में दोनों ग्वालियर में लिव-इन में रह कर एक-दूसरे को आजमा सकते हैं।

ग्वालियर में दोनों लिव-इन में रहने के बाद शादी का फैसला कर लेते हैं, मगर तभी उनके प्यार पर नजर लग जाती है। गुड्डू के भाई का साला बाबूलाल (पंकज त्रिपाठी) दोनों को साथ देख लेता है और उन्हें मैरिड कपल समझकर गुड्डू के पूरे परिवार को ग्वालियर ले आता है। गुड्डू को कोसने-पीटने के बाद दोनों के परिवार उन्हें शादीशुदा मानकर अपना लेते हैं, मगर गुड्डू और रश्मि की मुसीबत यह है कि दोनों की शादी नहीं हुई है और अब दोनों लुक छिप कर तरह-तरह से शादी करने की तिकड़में लगाते हैं। अब क्या गुड्डू-रश्मि की शादी होगी या नहीं इसके लिए आपको फिल्म देखनी पड़ेगी।

डायरेक्शन

निर्देशक लक्ष्मण उतेकर ने अपनी फिल्म के जरिए लिव इन जैसे बेहद ही सामयिक विषय को बहुत ही खूबसूरती से उठाया है। फिल्म बहुत ही लाइट मोमेंट्स के साथ शुरू होती है। फर्स्ट हाफ में ज्यादा कुछ घटता नहीं, मगर सेकंड हाफ में कहानी कई मजेदार टर्न्स और ट्विस्ट के साथ आगे बढ़ती है। निर्देशक ने शादी और लिव इन के बहाने मोरल पुलिसिंग पर भी कटाक्ष किया है, मगर बहुत ही हलके-फुलके अंदाज में। फिल्म जेंडर इक्वॉलिटी, कास्ट सिस्टम और छोटे शहर की सोच को भी छूती है।

एक्टिंग

गुड्डू के रूप में कार्तिक की एक्टिंग काफी मजेदार है। उनके एक्सप्रेशन का भोलापन और आंखों की ईमानदारी किरदार को बेचारा होने के साथ-साथ विश्वसनीय भी बनाती है। कृति सेनन ने ‘बरेली की बर्फी’ के बाद एक बार फिर अपनी भूमिका को अपने अंदाज में निभाया है। दोनों की केमस्ट्री कमाल की रही है। फिल्म में पंकज त्रिपाठी ने बाबूलाल की भूमिका में अपने खास कॉमिक अंदाज में दर्शकों को खूब हंसाया है। अपारशक्ति खुराना भी अब्बास के रूप में याद रह जाते हैं।

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