मनोरंजन

चमन बहार – फ़िल्म के कई धांसू डायलॉग अभी से छत्तीसगढ़ के युवकों के बीच मात्र दो तीन दिन के भीतर ही छाने लगा है

जब से फिल्मी दुनिया से मल्टीप्लेक्स का साथ जुड़ा,तब से पारम्परिक फिल्मों के साथ ही कई नई तरह की फिल्में भी देखने को मिली हैं। ऐसी फिल्में खूब पसंद भी की जाती है। इनके साथ ही छोटे शहरों और कस्बों को मौका मिलने लगा है। यहां के कलाकारों के साथ कई कहानियां भी पटकथा के रूप में सामने आई हैं। ऐसी फिल्में ज्यादातर कम बजट की ही बनाई जाती हैं।

इन्हीं फिल्मों की शृंखला में बीते दिनों ‘ चमन बहार ‘नामक फिल्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज की गई। यह हिंदी फिल्म है। इसकी पृष्ठभूमि छत्तीसगढ़ के छोटे से कस्बे लोरमी की है। फिल्म की कहानी एक पान दुकान संचालक के इर्द गिर्द घूमती है। वह एक वनकर्मी का पिता है। पिता ने उसे भी वन विभाग में लगा दिया था। मगर भालू के डर से काम छोड़कर उसने पान की दुकान खोल ली। दुकान चल नहीं रही थी और वह मक्खी मारते बैठे रहता है।

कहानी में ट्विस्ट तब आती है जब उसकी दुकान के ठीक सामने स्थित एक बंगले में इंजीनियर साहब का परिवार रहने आता है। इंजीनियर साहब की एक खूबसूरत बेटी है जो स्कूटी से स्कूल आती जाती है। फिर क्या उसका पीछा करने वाले लड़कों का फिल्म के नायक की दुकान में भीड़ लगनी शुरू हो जाती है। एकतरफा प्यार के दीवाने लड़के टाइम पास के लिए पान गुटखा, सिगरेट आदि चीजें दुकान से खरीदने लगते हैं। इससे दुकान चल नहीं दौड़ निकल पड़ती है। बड़े बड़े धुरंधर लड़की से एकतरफा प्यार करने लगे। इनमें एक नेता पुत्र, बड़े बिजनेसमैन का पुत्र, लड़की की अंग्रेजी शिक्षक जो कि उसकी प्यार में शराबी तब बन गया समेत फिल्म का नायक खुद भी शामिल था।

इस फिल्म की कहानी में थोड़ा सा झोल नजर आता है। किंतु फिल्म की असली जान इसके डायलॉग हैं। सिगरेट नहीं मिलने पर एक लड़का कहता है कि ” खून में निकोटिन की कमी हो गई है “। ऐसे कई धांसू डायलॉग अभी से छत्तीसगढ़ के युवकों के बीच मात्र दो तीन दिन के भीतर ही छाने लगा है। और क्या क्या हाल है भांचा ये किसी को सम्बोधित करने का ठेठ बिलासपुरिया अंदाज है। ऐसी कई बातों का समावेश किया गया है। फिल्म की कहानी को जोड़कर रखने वाले दो हंसोड़ पात्र बात बात पर लोगों को डैडी बोलकर सम्बोधित करते हैं। डैडी शब्द का नशा भी युवाओं में छाने लगा है।

इस फिल्म की असली मिठास फिल्म में दिखाए गए जगह हैं। इसमें बिलासपुर, मुंगेली लोरमी जैसी जगहों को दर्शाया गया है। जो कि फिल्म में अपनापन लाती है। फिल्म के ज्यादातर हिस्से की शूटिंग करीब साल भर पहले रायपुर के माना इलाके में की गई है। फिल्म में भगवान तिवारी समेत एक दो चिरपरिचित चेहरे हैं। कलाकारों ने अपनी ओर से जमकर मेहनत की है। इसके निर्देशक अपूर्व बड़गैया हैं। इन्होंने अपनी फेसबुक आईडी में रहने का पता महाराष्ट्र लिखा है।

छत्तीसगढ़ी फिल्मों की बात करें तो कही देबे सन्देश और घर द्वार के लंबे अंतराल के बाद छत्तीसगढ़ राज्य नव निर्माण के समय ‘ मोर छईया भुंइया ‘ आई थी और छा गई थी। वही मिठास हिंदी फिल्म ‘ चमन बहार ‘ में भी महसूस की जा रही है। फिलहाल यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध है। टेलीग्राम एप पर भी इसे जमकर शेयर किया जा रहा है। अंचल के युवाओं के उत्साह को देखते हुए लग रहा है जब भी कभी यह फिल्म बड़े पर्दे पर आएगी तो वहां भी छा जाएगी।

वैसे इस फिल्म को पूरे भारत भर में पसन्द किया जा रहा है। कवि कुमार विश्वास समेत वरिष्ठ आईएएस सोनमणी बोरा ने भी ट्विटर पर फिल्म की तारीफ की है।
(लेख अजय कुमार वर्मा जी की फेसबुक वॉल से साभार)

|

Related Articles

Back to top button