इन पांच शर्तो पर मिली है केजरीवाल को जमानत, जानिए सुप्रीम कोर्ट की क्या हैं शर्ते |
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इन पांच शर्तो पर मिली है केजरीवाल को जमानत, जानिए सुप्रीम कोर्ट की क्या हैं शर्ते

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उन्हें लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए एक जून तक अंतरिम जमानत दे दी। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा कि कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में गिरफ्तार केजरीवाल को दो जून को आत्मसमर्पण करना होगा और जेल वापस जाना होगा।

केजरीवाल की जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट की 5 शर्तें

1. सुप्रीम कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को 50 हजार के निजी मुचलके पर जमानत दी है।

2. आदेश में कहा गया है कि केजरीवाल मुख्यमंत्री दफ्तर और दिल्ली सचिवालय नहीं जाएंगे।

3. अरविंद केजरीवाल बिना उपराज्यपाल की अनुमति के किसी फाइल पर साइन नहीं करेंगे।

4. दिल्ली के सीएम केजरीवाल शराब नीति घोटाले में अपने भूमिका को लेकर कोई टिप्पणी करेंगे।

5. अरविंद केजरीवाल जमानत के दौरान इस मामले के किसी गवाह से भी संपर्क नहीं करेंगे।

ED की इस दलील को अदालत मे किया खारिज

केजरीवाल को बल देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में एक अहम टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस वक्त देश में सबसे अहम चुनाव हो रहे हैं जो कि लोकसभा के हैं। इस राष्ट्रीय महत्व के चुनाव में देश के कुल 97 करोड़ मतदाताओं में से करीब 65 से 70 करोड़ वोटर्स अगले 5 साल के लिए देश की सरकार चुनेंगे। देश का आम चुनाव लोकतंत्र को संजीवनी प्रदान करता है। हम ED की इस दलील को खारिज करते हैं कि केजरीवाल को बेल देना उन्हें आम जनता की तुलना में ज्यादा विशिष्ट स्थान देगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहां की जांच एजेंसी का यह तर्क बिल्कुल सही है कि अरविंद केजरीवाल को 9 समन जारी किए गए और उसके बावजूद भी समन का पालन नहीं किया। ED का यह तर्क जाहिर तौर पर केजरीवाल के खिलाफ जाता है, लेकिन जमानत देते हुए हमने अन्य पहलुओं पर भी विचार किया है। कोर्ट ने अभी का अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं और राष्ट्रीय दल के नेता और राष्ट्रीय दल के संयोजक भी हैं। ऐसे में उनके उपर जो आरोप लगाए गए हैं, वह गंभीर हैं लेकिन अभी तक उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है। नहीं उनका कोई आपराधिक इतिहास है और ना ही समाज को उनसे कोई खतरा है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा अगस्त 2022 से मामला लंबित है अरविंद केजरीवाल को 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है। ऐसे मामले में केजरीवाल की जमानत के आधार को फसलों की कटाई या फिर किसी व्यवसायिक गतिविधि से नहीं जोड़ा जा सकता है। कोर्ट ने कहा है कि हमने केजरीवाल की लोकसभा चुनाव में भूमिका को देखते हुए जमानत दी है। कोर्ट ने कहा है कि केजरीवाल को जमानत देना कोई अनोखा मामला नहीं है ऐसे कई मौकों पर सुप्रीम कोर्ट ने कई आरोपियों को अंतरिम जमानत दी है।

पीठ ने केजरीवाल के वकील अभिषेक सिंघवी के इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया कि उन्हें पांच जून तक अंतरिम जमानत दी जाए। एक जून को लोकसभा चुनाव के लिए सातवें और अंतिम चरण के तहत मतदान होगा। मतगणना चार जून को होगी। न्यायालय ने कहा कि केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने के कारणों का विवरण बाद में दिया जाएगा।

21 दिन के लिए अंतरिम जमानत देने से नहीं पड़ेगा फर्क

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने चुनाव प्रचार के आधार पर आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक को अंतरिम जमानत दिए जाने का विरोध करते हुए कहा कि ऐसा कोई पूर्व उदाहरण नहीं है। न्यायालय ने कहा कि केजरीवाल को 21 दिन के लिए अंतरिम जमानत देने से कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। पीठ ने कहा कि ईडी की ‘प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट’ (ईसीआईआर) अगस्त 2022 में दर्ज की गई थी जबकि मुख्यमंत्री को इस साल 21 मार्च को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तारी की टाइमिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

पीठ ने ईडी से कहा, ‘वह डेढ़ साल तक बाहर रहे। उन्हें पहले या बाद में गिरफ्तार किया जा सकता था लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।’ मेहता और राजू ने न्यायालय से जमानत शर्तें लागू करने का अनुरोध किया जिनमें यह भी शामिल हो कि केजरीवाल आबकारी नीति मामले के संबंध में कुछ नहीं कहेंगे। पीठ ने कहा कि जमानत की शर्तें वैसी ही होंगी जैसी ‘आप’ नेता संजय सिंह के मामले में लागू की गई थीं। सिंह को इसी मामले के सिलसिले में पिछले महीने जमानत दी गई थी।

केजरीवाल की ओर से न्यायालय में पेश हुए वकील शादान फरासत के अनुसार अदालत ने बहुत संक्षिप्त मौखिक आदेश सुनाया है। उन्होंने कहा, ‘हमने अभी तक लिखित आदेश नहीं देखा है। इसलिए हमें लिखित आदेश की वास्तविक विषयवस्तु नहीं पता। अदालत ने कहा कि वे केजरीवाल को दो जून तक अंतरिम जमानत/जमानत पर रिहा कर रहे हैं और इस तरह की कोई शर्त नहीं है कि वह इन 20-22 दिन रिहाई के दौरान प्रचार के समय क्या कह सकते हैं और क्या नहीं कह सकते।’

फरासत ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि आज यह आदेश अद्यतन होगा और तब हम उनकी रिहाई के लिए उचित प्रक्रिया अपनाएंगे।’ शीर्ष अदालत मामले में केजरीवाल की गिरफ्तारी को बरकरार रखने के दिल्ली उच्च न्यायालय के पिछले महीने के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई कर रही है।

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