पहला बाल्य मृतक अंगदान,11 साल के मासूम प्रखर ने बचाई जिंदगियां, रामकृष्ण हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. संदीप दवे ने डोनर परिवार की प्रशंसा की |
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पहला बाल्य मृतक अंगदान,11 साल के मासूम प्रखर ने बचाई जिंदगियां, रामकृष्ण हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. संदीप दवे ने डोनर परिवार की प्रशंसा की

रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल ने प्रदेश में अंगदान के लिए विशेष मुहिम चला रखी थी। इस मुहिम के तहत ब्रेन डेड मरीजों के परिजनों की काउंसलिंग कर उन्हें अंगदान कर दूसरों को जीवनदान देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा था। इस मुहिम के तहत रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल के डॉक्टर्स एवं स्टाफ ने भी विगत दिनों अंगदान के लिए संकल्प पत्र भरा था।

इस विषय पर चर्चा करते हुए रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. संदीप दवे ने बताया कि मेडिकल क्षेत्र में हुए नवाचारों के कारण अब बहुत से अंगों का प्रत्यारोपण संभव है जैसे कि किडनी, लिवर, हार्ट इत्यादि। इन प्रत्यारोपणों की सफलता का प्रतिशत भी लगातार बेहतर होता चला जा रहा है जिससे कि कई कम उम्र के लोगों को नया जीवन प्राप्त हो रहा है। परंतु समस्या यह है कि हमारे देश में इस विषय पर जागरूकता कम होने के कारण अंगों की आवश्यकता लाखों में है जबकि दानदाता सिर्फ कुछ हजार ही आगे आते है। इन परिस्थितियों में एैसे मरीज, जिन्हें अंग प्राप्त होने पर वे लंबा जीवनयापन कर सकते हैं, उन्हें असमय काल के गाल में समाता हुआ देख कर बेहद पीड़ा महसूस होती है। इसी लिए हमने इस विषय पर जगरूकता फैलाने के लिए अभियान चलाया है।

हॉस्पिटल के HCOO डॉ. अखिल जैन ने बताया कि विगत 1 जुन को फुटबॉल खेलते समय सर पर गहरी चोट आने के कारण 11 वर्षिय बालक प्रखर को अस्पताल लाया गया था। 5 दिनों तक हर संभव प्रयास के बाद भी बालक का ब्रेन डेड हो गया। तब हमारी डॉक्टर्स की टीम ने बालक के पिता रमेश साहू एवं माता मंजू साहू की अंगदान के लिए काउंसलिंग की और उन्होंने यह साहसिक निर्णय लेते हुए सहमति प्रदान कर दी।

ग्रीन कॉरीडोर का अंगों को समय से अन्य अस्पतालों में भर्ती ज़रूरतमंद मरीज़ों को पहुँचाया गया

इसके पश्चात रामकृष्ण केयर के मेडिकल एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. संदीप दवे के नेतृत्व में अनुभवी डॉक्टर्स की टीम जिसमें न्यूरो सर्जन डॉ. एस. एन. मढ़रिया, किडनी ट्रांस्प्लांट टीम के डॉ. अजय पराशर, डॉ. संजीव अनंत काले, डॉ. प्रवाश चौधरी, डॉ. हर्ष जैन, डॉ. मलय रंजन, लिवर ट्रांस्प्लांट टीम के डॉ. मोहम्मद अब्दुन नईम, डॉ. अजित मिश्रा, डॉ. युक्तांश पाँडे, डॉ. राजकुमार, डॉ. धीरज प्रेमचन्दानी, क्रिटिकल केयर टीम के डॉ. विशाल कुमार, डॉ. राकेश अग्रवाल, एनेस्थिस्ट डॉ. श्रुति खारखेड़कर, रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल के HCOO डॉ. अखिल जैन एवं ओटी, नर्सिंग व ट्रांस्प्लांट सहायक टीम आदि शामिल थे, ने मिलकर किडनी एवं लिवर ट्रांसप्लांट की जटिल प्रक्रिया को पूरा किया। इसके अतिरिक्त पुलिस प्रशासन के सहयोग से ग्रीन कॉरीडोर का निर्माण कर अंगों को समय से अन्य अस्पतालों में भर्ती ज़रूरतमंद मरीज़ों को पहुँचाया गया।

डॉक्टर संदीप दवे ने कहा कि डोनर परिवार की जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है क्योंकि उन्होंने अपने को खो कर 10 दूसरे लोगों को जीवनदान दे दिया| इनमें से एक तो मात्र 10 वर्ष का बालक है जो आशाहीन अंत से सामान्य जीवन की ओर अपने कदम बढ़ाएगा और यह इस परिवार के संकल्प के बगैर संभव नहीं था। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि इस प्रकरण के द्वारा अंगदान के महत्व को समझते हुए भविष्य में और लोग भी आगे आकर अन्य मरीजों के लिए जीवन का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

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