खतरनाक बीमारी के चक्कर में आ रहे बच्चे, डॉक्टर ने कही इतनी गंभीर बात |
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खतरनाक बीमारी के चक्कर में आ रहे बच्चे, डॉक्टर ने कही इतनी गंभीर बात

स्क्रीन टाइम यानी टीवी, मोबाइल, लैपटॉप पर लगातार घंटों बिताना! इन दिनों इस नाम का ट्रेंड चल रहा है. यह एक बीमारी का रूप लेता जा रहा है. इससे बच्चों में वर्चुअल ऑटिज्म की समस्या बढ़ रही है. इसमें बच्चे समय पर बोलना नहीं सीख पाते. साथ ही उनके मानसिक विकास में भी बाधा आ आती है.

रायपुर के जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, एम्स समेत प्रदेश भर के अस्पतालों में इस तरह की शिकायत बड़ी संख्या में दिखाई दे रही है. माता-पिता बच्चों को लिए लगातार अस्पताल पहुंच रहे हैं. डॉक्टरों के अनुसार जिला अस्पताल, रायपुर मेडिकल कॉलेज में इस तरह के हर महीने 30 से 40 केस आ रहे हैं.

डॉक्टरों ने बताया कि सामान्य बच्चा 2 साल तक बोलना सीख जाता है. लेकिन, इन दिनों बच्चे टीवी, मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप पर स्क्रीन टाइम के चलते उसी में खो जाते हैं. इस वजह से वे समय पर बोलना नहीं सीख पाते. इससे उनके दिमाग पर भी नकारात्मक असर हो रहा है. जिला अस्पताल रायपुर के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर निलय मोझरकर का कहना है कि वर्चुअल ऑटिज्म से बचाव के लिए बच्चों को स्क्रीन से दूर रखें.

उन्होंने कहा कि उनके मानसिक और शारीरिक विकास पर ध्यान दें. माता-पिता अपने बच्चों के साथ टाइम बताएं. अगर बच्चा समय पर बोलना नहीं सीख रहा या उसमें किसी तरह से असहज लक्षण दिखें तो तुरंत शिशु रोग विशेषज्ञ की सलाह लें. डॉक्टर निलय मोझरकर ने कहा कि राज्य में 100 में एक बच्चे को यह शिकायत आ रही. जिला अस्पताल में स्क्रीनिंग के साथ इलाज की सुविधा भी दी जा रही है.

घरों में बिगड़ रही स्थिति

विशेषज्ञ बताते हैं कि वर्चुअल ऑटिज्म की वजह से घरों की स्थिति बिगड़ रही है. माता-पिता को समझ नहीं आ रहा कि बच्चे में क्या कमी है. इस वजह से वे मानसिक दबाव में हैं. कुछ माता-पिता इसे सामान्य तौर पर ले रहे हैं, तो कुछ परेशान होकर डॉक्टरों के चक्कर काट रहे हैं. उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा समस्या उन परिवारों में जहां माता-पिता दोनों काम करते हैं और बच्चा दिनभर अकेला किसी और के साथ समय बिताता है. ऐसे में उसकी देख-रेख करने वाले लोग खुद ही बच्चे को व्यस्त रखने के लिए टीवी या मोबाइल थमा देते हैं. ये बीमारी बच्चे को कब अपनी चपेट में ले लेती है इसका पता नहीं चलता, यही इस बीमारी का सबसे चिंताजनक पहलू है.

बच्चों में वर्चुअल ऑटिज्म की स्थिति

2 साल तक बच्चे बोलना सीख जाते हैं

5 साल तक भी बोलने में दिक्कत होती है वर्चुअल ऑटिज्म में

5 साल के 6.30 लाख बच्चे हैं छत्तीसगढ़ में

100 में से 1 बच्चे में वर्चुअल ऑटिज्म की शिकायत

7 जिला अस्पतालों में इलाज के लिए डिस्ट्रिक्ट अर्ली इनर्वेशन सेंटर है. लेकिन ये सिर्फ नाम के हैं

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