छत्तीसगढ़

1000 करोड़ के छत्तीसगढ़ के कथित घोटाला मामले में रिव्यू पिटीशन दायर

1 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि का कथित घोटाला एनजीओ के नाम पर करने की जांच सीबीआई को सौंपी गई

हाईकोर्ट की विशेष बेंच द्वारा 1 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि का कथित घोटाला एनजीओ के नाम पर करने की जांच सीबीआई को सौंपी गई है। मामले में एक सप्ताह में एफआईआर दर्ज करने कहा गया है। इस आदेश के सार्वजनिक होते ही आरोपी बनाए गए सभी अफसर शुक्रवार को हाईकोर्ट पहुंचे। दोपहर में महाधिवक्ता कार्यालय में अपने-अपने अधिवक्ताओं से आगे अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के बारे में चर्चा की।

इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और हाईकोर्ट के अधिवक्ता सहित अन्य ने आगे की प्रक्रिया के बारे में बताया। संस्था के सदस्य सतीश पांडेय ने अधिवक्ता अवि सिंह के माध्यम से रिव्यू पिटीशन दायर की। इस पर अभी सुनवाई नहीं हुई है। समाज कल्याण विभाग से संबंधित राज्य स्रोत निशक्त जन संस्थान माना रायपुर के नाम पर 1000 करोड़ रुपए का घोटाला करने का आरोप है।

बता दें कि रायपुर के रहने वाले कुंदन सिंह ठाकुर ने अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर के माध्यम से दायर जनहित याचिका की थी। हाईकोर्ट ने गुरुवार को मामले की सुनवाई के बाद केस की जांच सीबीआई को सौंप दी।

मामले में विवेक ढांड, एनके राउत, आलोक शुक्ला, सुनील कुजूर, बीएल अग्रवाल, सतीश पांडेय, पीपी सोती, राजेश तिवारी, अशोक तिवारी, हरमन खलखो, एमएल पांडेय, पंकज वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का भी आदेश दिया है। हाईकोर्ट के इस आदेश के सार्वजनिक होते ही अफसरों में हलचल मच गई। सभी अफसर कानूनी सलाह और हाईकोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर करने के लिए शुक्रवार को हाईकोर्ट पहुंचे। यहां उन्होंने महाधिवक्ता कार्यालय में महाधिवक्ता कक्ष में बैठकर अपने-अपने अधिवक्ताओं से चर्चा की।

इस दौरान राज्य स्रोत निशक्त जन संस्थान के सदस्य सतीश पांडेय ने रिव्यू पिटीशन दायर की। उसे मेंशन के लिए जस्टिस प्रशांत मिश्रा और जस्टिस गौतम चौरड़िया की डिवीजन बेंच में प्रस्तुत किया गया। जस्टिस प्रशांत मिश्रा और जस्टिस पीपी साहू की विशेष बेंच द्वारा आदेश दिए जाने के कारण पेश रिव्यू पिटीशन पर सुनवाई नहीं हो सकी। इससे सभी अफसर अपने-अपने मामले में अधिवक्ताओं से कानूनी सलाह लेकर वापस लौट गए।

वहीं बेंच कर सकता है आदेश पर रिव्यू जिसने दिया आदेश :

वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. शैलेष आहूजा ने बताया कि रिव्यू पिटीशन पर वही बेंच सुनवाई करने का अधिकार रखती है जिसने आदेश दिया और फैसला सुनाया है। जस्टिस प्रशांत मिश्रा और जस्टिस पीपी साहू की विशेष बेंच ने इस मामले में आदेश दिया है, तो रिव्यू पिटीशन पर आगे सुनवाई भी वही बेंच करेगी। शुक्रवार को यह बेंच मौजूद नहीं थी, इसके कारण भी यह सुनवाई नहीं हो सकी। बेंच बनाने का फैसला हाईकोर्ट चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन करेंगे। वे खुद छुट्टी पर थे इसके कारण भी यह बेंच नहीं बनाया जा सका। रिव्यू पिटीशन पर अब तभी सुनवाई होगी जब आदेश देने वाली बेंच बनाई जाए।

सुनवाई का मौका नहीं दिया गया इसलिए याचिका: अवि

सतीश पांडेय के अधिवक्ता अवि सिंह ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि संस्था को दो साल के लिए काम मिला था। एक साल में संस्था को 34 लाख रुपए मिले इस हिसाब से 68 लाख रुपए ही हुए। यह राशि भी निशक्तजनों के लिए थी।

कहा गया कि याचिकाकर्ता ने जो राशि बताई है वह गलत है, क्योंकि सभी को पेमेंट चेक के माध्यम से किया गया है। साथ ही नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं किया गया। मामले में जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश कोर्ट ने दिया है उनको सुनवाई का मौका भी नहीं दिया गया है। इसके कारण रिव्यू पिटीशन दायर कर रहे हैं।

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