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NMDC चेयरमैन बैजेंद्र कुमार ने एससीएक्स कांफ्रेंस में दिया स्पीच, बोले….स्टील में चीन, जापान को पीछे छोड़ देगा भारत, छत्तीसगढ़ की भी हुई चर्चा

एनएमडीसी के आईएएस सीएमडी एन बैजेंद्र कुमार को सिंगापुर स्टॉक एक्सचेंज के ग्लोबल कांफ्रेंस को एड्रेस किया। यह पहला मौका होगा, जब एससीएक्स के कांफ्रेंस में भारत के किसी पब्लिक सेक्टर के सीईओ को स्पीच देने के लिए बुलाया गया हो।

बैजेंद्र कुमार ने दुनिया भर के इस्पात क्षेत्र के सीईओ को संबोधित करते हुए बताया कि किस तरह भारत चीन, जापान एवं यूरोपीय देशों को पीछे छोड़कर स्टील का एक प्रमुख केंद्र बन जाएगा। इसके लिए एनएमडीसी ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है। कोशिश है, दो-तीन साल में कंपनी की क्षमता दोगुनी हो जाए।

बैजेंद्र कुमार ने छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में कंपनी के खदानों का भी जिक्र किया। जाहिर है, एनएमडीसी की 70 फीसदी खदानें बस्तर में है। कांफ्रेंस में मौजूद ग्लोबल कंपनियों के दिग्गज सीईओ ने छत्तीसगढ़ को लेकर काफी उत्सुकता जताई है।

सिंगापुर में आयोजित लौह अयस्‍क सप्‍ताह में बोलते हुए बैजेंद्र कुमार ने कहा कि भारत विश्‍व में इस्‍पात का एक प्रमुख केंद्र रहेगा। इस्‍पात उत्‍पादन तथा उसकी मांग 6-7% से अधिक की मजबूत दर से बढ़ेगी जबकि चीन, जापान तथा यूरोपियन यूनियन जैसे देशों/क्षेत्रों में उत्‍पादन तथा उपभोग निकट भविष्‍य में स्थिर रहने की संभावना है।

सरकार द्वारा मूलभूत सुविधाओं पर दिए जा रहे बल से इस्‍पात नीति, 2017 में निर्धारित लक्ष्‍य पूर्ण हो सकेंगे। राष्‍ट्रीय इस्‍पात नीति में वित्‍त वर्ष 31 तक निर्धारित 300 मिलियन टन के लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने के लिए प्रति व्‍यक्ति इस्‍पात की खपत तथा इस्‍पात उत्‍पादन की क्षमता में वृद्धि हो रही है।

वर्तमान में इस्‍पात क्षेत्र में 14-15 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश हो रहा है, जिससे इस्‍पात निर्माण की क्षमता में बड़ी बढ़ोत्‍तरी होगी। एनएमडीसी लौह अयस्‍क की बढ़ती हुई मांग को पूरा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है तथा आगामी तीन से चार वर्षों में अपनी क्षमता को लगभग दो गुना करने के लिए खानों में तथा निकासी क्षमता में वृद्धि के लिए निवेश कर रहा है।

बता दें कि एनएमडीसी भारत का सबसे बड़ा तथा विश्‍व स्‍तर पर दसवां सबसे बड़ा लौह अयस्‍क उत्‍पादक है। इसके पास विश्‍व में सर्वोच्‍च एफई कंटेट वाला गुणवत्‍ता पूर्ण अयस्‍क है तथा भारत की बढ़ती हुई आवश्‍यकताओं को पूर्ण करने के लिए आवश्‍यकता से अधिक लौह अयस्‍क रिजर्व हैं।

एनएमडीसी उत्‍पादन लागत, कर्मचारी लागत के क्षेत्र में विश्‍व के सर्वोत्‍तम प्रचालनों में से है तथा इसका कार्य निष्‍पादन बड़े   अंतर्राष्‍ट्रीय संस्‍थानों जैसे वेल, रियो टिंटो, एफएमजी आदि के समतुल्‍य है।

पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्‍तरदायित्‍व तथा विनियामक अनुपालन में इसका उत्‍कृष्‍ट रिकार्ड है। इसका लौह अयस्‍क उत्‍पादन आयातित अयस्‍क के मुकाबले 50 – 55% तक सस्‍ता है।  इससे भारतीय इस्‍पात उद्योग को प्रतिस्‍पर्धात्‍मक लाभ प्राप्‍त होता है।

एनएमडीसी बैलाडीला क्षेत्र से अपनी टेलिंग को निर्यात करने के अवसर भी तलाश रहा है क्‍योंकि अयस्‍क की वर्तमान अंतर्राष्‍ट्रीय कीमतों को देखते हुए ऐसा करना व्‍यावहारिक तथा लाभप्रद है।

इस संबंध में आईओडब्‍ल्‍यू के अनेक प्रतिभागियों ने अपनी उत्‍सुकता जाहिर की है तथा अनेक व्‍यापारियों ने जानकारियां प्राप्‍त की हैं। किसी भारतीय कंपनी के सीईओ द्वारा ऐसे प्रतिष्ठित अंतर्राष्‍ट्रीय कार्यक्रम में प्रतिभागिता करने का यह पहला अवसर है।

कार्यक्रम के एक भाग के रूप में सीईओ के राउंड टेबल कान्‍फ्रेंस के दौरान श्री एन. बैजेन्‍द्र कुमार, आईएएस ने बताया कि छत्‍तीसगढ़ सरकार ने एक वरिष्‍ठ ब्‍यूरो‍क्रेट के रूप में कार्य के अनुभव से उन्‍हें एनएमडीसी के सीएमडी के रूप में कार्य करने में बहुत सहायता मिली है। छत्‍तीसगढ़ खनन की दृष्टि से एक कठिन क्षेत्र है और वहां कंपनी की बड़ी खानें स्थित हैं।

उन्‍होंने कहा कि खनन कंपनी के लिए यह आवश्‍यक है कि वह स्‍थानीय समुदाय  का ध्‍यान रखे और एनएमडीसी में कार्यभार संभालने के समय से ही उन्‍होंने इस पर अपना ध्‍यान केंद्रित रखा है। उन्‍होंने विख्‍यात अंतर्राष्‍ट्रीय संस्‍था एंग्‍लो अमेरिकन की पूर्व मुख्‍य अधिशासी अधिकारी सुश्री सिंथिया कैरोल से इस बात पर सहमति व्‍यक्‍त की कि किसी भी खनन कंपनी की सफलता के लिए पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक पहलें तथा अनुपालन प्रमुख क्षेत्र हैं।

उन्‍होंने बताया कि एनएमडीसी ने पिछले वर्ष सीएसआर के लिए  प्‍लेट्स अवार्ड जीता है तथा इस वर्ष भी इस पुरस्‍कार के लिए उसका नाम शामिल किया गया है। उन्‍होंने कहा कि विश्‍व स्‍तर के ऐसे कार्यक्रमों में एनएमडीसी को प्रतिभागिता करने में प्रसन्‍नता होगी।इससे कंपनी का प्रचार होगा तथा निवेशकों में विश्‍वास उत्‍पन्‍न होगा। उन्‍होंने अपने समकक्षों से इस बात पर सहमति व्‍यक्‍त की थी कि एनएमडीसी की उपस्थिति विश्‍व समुदाय में अधिक नहीं रही है तथा वित्‍तीय एवं उत्‍पादन संबंधी इसकी प्रशंसनीय उपलब्‍धियों को देखते हुए यह बहुत कम है।

उन्‍होंने आश्‍वासन दिया कि वैश्विक इस्‍पात तथा लौह अयस्‍क समुदाय एवं निवेशकों के साथ सूचना के आदान-प्रदान करने एवं वार्तालाप करने में वे व्‍यक्तिगत रूप से ध्‍यान देंगे ताकि एनएमडीसी को ऐसा सम्‍मान मिले जिसका कि वह पात्र है।

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