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गरियाबंद- जिले में सरकारी डॉक्टर ने दिया था इस्तीफा, CMHO और सिविल सर्जन पर गंभीर आरोप, 49 बिंदुओं की शिकायत पर अब तक कोई जांच नहीं

मामले की शिकायत डॉ अग्रवाल ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव , मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव तक से की है पर नतीजा सिफर

एक तरफ सरकार डॉक्टरों की नियुक्ति को लेकर हर संभव प्रयास कर रही है वहीँ कुछ अधिकारीयों के चलते डॉक्टर का इस्तीफ़ा देने का मामला गरियाबंद जिले में सामने आया है। दरअसल डॉ. महावीर प्रसाद अग्रवाल ने अपने
चरित्रहनन का आरोप लगाया है और उन्होंने सरकारी सेवा से इस्तीफ़ा भी दे दिया।

जिला कलेक्टर को दिए गए इस्तीफे में डॉ महावीर ने सिविल सर्जन पर गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने आरोप में कहा है कि सिविल सर्जन द्वारा उनका 9 महीने पहले का वीडियो वायरल कर चरित्रहनन किया है। उनका कहना है कि वीडियो भी दुर्भावना वाश ही बनाया गया था जिसके उनकी छवि को धूमिल किया जा सके।

उन्होंने 49 बिंदुओं पर इस्तीफ़ा देते हुवे कहा कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नवरत्ने और सिविल सर्जन टंडन पर आरोप लगते हुवे कहा कि जिला अस्पताल के सभी डॉक्टर शराब का सेवन करते हैं और पार्टी करते हैं। एक पार्टी के दरम्यान मुझे शराब पिलाया गया और नशे की अधिकता में षडयंत्रपूर्वक मेरा वीडियो बनाकर 9 महीने बाद सोशल मीडिया के माध्यम से वायरल करवाया।

डॉक्टर अग्रवाल ने बताया कि उन्हें अंदेशा है कि पूर्व में उनके द्वारा CMRC राशि लें दें के संबंध अधिकारी से कहासुनी हुई थी जिस बात से प्रताड़ित करने के उद्देश्य से वीडियो को जानबूझकर वायरल किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि षडयंत्रपुरक मुझे शराब पिलाया गया और मुझे टारगेट करते हुवे वीडियो बनाया।

डॉक्टर अग्रवाल ने अस्पताल में भी निम्न स्तरीय दवाओं का वितरण और इस्तेमाल करनेका भी आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अच्छी ब्रांड की दवाएं मौजूद होने के बाद भी उन दवाओं का इस्तेमाल न कर मरीजों को घटिया स्तर की दवाये वितरित की जाती है जिससे इलाके के लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जाता है। सिविल सर्जन और CMHO द्वारा अस्पताल में चेम्बर तो है पर वे किसी का इलाज करने की जहमत नहीं उठाते हैं।

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आपको बता दें कि गरियाबंद जिला आदिवासी बाहुल्य इलाका है एवं यहां की सबसे बड़ी समस्या सूपेबेडा है। यहाँ मरीज किडनी की समस्या से ग्रसित है और उचित इलाज के अभाव में जान गवां चुके हैं। विगत दो तीन वर्षों से जिला अस्पताल में कई विशेषज्ञ डॉक्टर आये पर अधिकारीयों के मनमानी के चलते सभी थक हारकर अपना ट्रांसफर लेकर चले गए। डॉ महावीर अग्रवाल द्वारा उठाये गए 49 बिंदुओं के सवालों पर न ही जिले के आलाधिकारी जाँच कर रहे न ही किसी प्रकार की कोई कार्यवाही हो रही है।

इतना ही नहीं मामले की शिकायत डॉ अग्रवाल ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, स्वास्थ्यमंत्री टीएस सिंहदेव , और मुख्य सचिव तक से की है पर नतीजा सिफर ही है। आरोप है कि जिले में सिविल सर्जन और CMHO वर्षों से पद में काबिज होकर मनमानी कर रहे हैं और जमकर भ्रस्टाचार कर रहें हैं।

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बहरहाल राज्य के गावों में ऐसे ही डॉक्टरों की समस्या बनी हुई है ऐसे में एक और डॉक्टर का त्यागपत्र देना क्षेत्र की जनता के लिए दुखद है। डॉ अग्रवाल ने बताया कि अधिकारी के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि उन पर जबरदस्ती मामला दर्ज करवाने पुलिस अधीक्षक को पत्र लिख रहें हैं। उनके द्वारा लगातार नोटिस का जवाब भी दिया जा रहा है परन्तु सिविल सर्जन और CMHO नवरत्ने उनको लगातार प्रताड़ित कर रहें हैं।

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