छत्तीसगढ़

आरंग के रीवां में चार हजार साल पुराने पांडुवंशीय और कुषाण काल के मिले अवशेष

छत्तीसगढ़ में पुरातत्विक नगर आरंग के समीप ग्राम रीवा में मिले पुरातत्व अवशेष ने एक बार फिर आरंग क्षेत्र के पुरातत्विक महत्व को सिद्ध कर दिया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आरंग के रीवा गांव में मिले अवशेष पांडुवंशीय और कुषाण काल के हैं, जो करीब चार हजार साल पुराने हैं।

वहीं खुदाई में 18 सौ वर्ष पुराने चांदी और सोने के सिक्के के साथ मणिकर्णिका भी मिली है। इससे पहले इसी जगह पर खुदाई के दौरान 18 सौ साल पुरानी ईटें भी मिल चुकी है। संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की तरफ से करायी जा रही खुदाई में यहां पहली-दूसरी सदी के अवशेष मिलने की बात कही जा रही थी।

रीवा ग्राम में जिस तरह के अवशेष मिले हैं, उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि ये इलाका लगभग 6वीं सदी में महत्वपूर्ण प्रशासनिक तथा व्यापारिक स्थल रहा होगा। विशेषज्ञों के बताया कि नौ जून की खुदाई में एक फीट की गहराई पर तीन तरह की ईटें मिली है, जिसमें 35 सेंटीमीटर, 19 सेंटीमीटर और 7 सेंटीमीटर की ईंटें शामिल हैं।

उत्खनन करते समय 40 से अधिक टीले मिले हैं, जो बौद्ध स्तूप की तरह हैं। खुदाई के 13 दिनों बाद बड़ी मात्रा में सोने-चांदी और तांबे के सिक्के मिले हैं। ये सिक्के सात वाहन काल के समय के हैं। अनुमान के मुताबिक महानदी के पश्चिमी किनारे में बसा ये शहर में सिक्के और मणिकणिकाएं बनायी जाती रही होगी। बाद में किसी वजह से यहां बसा शहर खंडहर बन गया।

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