छत्तीसगढ़

शिक्षाकर्मियों को हाईकोर्ट से मिली बड़ी जीत…..2 जुलाई को भी नियुक्ति होने वाले शिक्षाकर्मियों को कोर्ट ने बताया संविलियन के पात्र

एक-दो दिन के फासले की वजह से संविलियन से वंचित रहे शिक्षाकर्मियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उन शिक्षाकर्मियों को भी संविलियन का पात्र मानने का आदेश शिक्षा विभाग को दिया है, जिनकी नियुक्ति 2 जुलाई को हुई थी।

इससे पहले राज्य सरकार ने संविलियन का जो आदेश दिया था, उसके मुताबिक 1 जुलाई 2018 तक 8 साल की सेवा पूर्ण करने की पात्रता रखी गयी थी। मतलब जिन लोगों ने 1 जुलाई 2010 को ज्वाइनिंग की थी और 1.7.2018 को 8 वर्ष पूर्ण कर ली थी, उनका संविलियन किया गया था…लेकिन जिन्होंने 2 जुलाई को ज्वाईनिंग की, उनका संविलियन नहीं किया गया। विभाग ने उन शिक्षाकर्मियों को 8 साल की सेवा में अपूर्ण माना।

राज्य शासन के इस नियम के विरुद्ध 02 जुलाई 2010 को कार्यभार ग्रहण करने वाले शिक्षाकर्मियों में कृष्ण कुमार ध्रुव, सिजूवेन्द्र साव, अमर सिंह श्याम, चंदन सिंह कंवर एवं मनोज कुमार कंवर जो सभी सूरजपुर के शिक्षाकर्मी थे उन्होंने अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी व नरेन्द्र मेहर के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल किया, इसमें कहा गया है कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति आदेश 21 जून 2010 को हुई है एवं कार्यभार 2 जुलाई 2010 को कराया गया।

सभी पक्षों को सुनने के बाद माननीय उच्च न्यायालय ने माना कि 2 जुलाई 2010 की नियुक्ति तिथि को स्वीकार करते हुए भी याचिकाकर्ताओं ने निर्विवाद रूप से अपनी 08 साल की सेवा को 01.07.2018 को पूरा करते हैं, एवं राज्य शिक्षा सचिव के आदेश 02.07. 2018 के नियमों के मापदण्ड को भी पूरा करता है।उच्च न्यायालय ने यह भी माना कि इस अदालत को इन याचिकाकर्ताओं को संविलियन का लाभ नहीं देने का कोई अच्छा कारण नहीं मिलता है।

माननीय उच्च न्यायालय का मत है कि याचिकाकर्ता 02.07. 2010 को कार्यभार ग्रहण कर के 01.07.2018 को 08 साल की सेवा पूरा करते हैं। सभी पक्षों पर विचार करने के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन के लिए पात्र पाया है। जस्टिस पी सैम कोसी ने इस याचिका में उत्तर वादियों को संविलियन किये जाने हेतु आदेश पारित किया है।

कोर्ट ने कहा है कि कार्य ग्रहण की दिनांक से गणना किए जाने से भी याचिकाकर्ता के 8 वर्ष पूर्ण हो जाते है, इसलिए शासन को याचिकाकर्ता के आवेदन को शासन के परिपत्रो के अनुसार निराकरण का आदेश दिया जाता है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को संविलीन के लिए पात्र 8 वर्ष की पात्रता को पूरा किया जाना माना हैं।

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