छत्तीसगढ़

देवभोग में फ्लोराइड युक्त पानी से एक साथ 21 बच्चे बीमार

देवभोग के धूपकोट प्राथमिक शाला में पढ़ने वाले 35 में से 21 बच्चे फ्लोराइड युक्त पानी पीने से बीमार पड़ गए. प्रधान पाठक की सूचना के बाद बीएमओ ने स्वास्थ्य टीम लेकर गांव पहुंचे. बीएमओ ने गांव कैंप लगाकर उपचार किया. ग्रामीणों को दूषित जल से बच्चों को दूर रखने की बात कही।

धूपकोट प्राथमिक शाला के प्रधान पाठक ने शुक्रवार को स्वस्थ्य विभाग को कुछ स्कूली बच्चों के बीमार होने की सूचना दिया, इनमें से 6 बच्चे टेकराम (10), घनश्याम (10), कुंती (9), बृंदा (9), मनीता (9), चूमन (6) को ज्यादा बीमार बताया. इसके बाद बीएमओ सुनील भारती स्वास्थ्य अमला लेकर स्कूल पहुंचे. पिछले 3-4 दिनों से पीड़ित 6 बच्चों को जांच कर बीएमओ ने बताया कि केवल गले मे सूजन थे. भोजन में दिक्कतें आ रही थी. यह दूषित जल सेवन से हो सकता है।

इनके अलावा अन्य 15 बच्चों का भी परीक्षण किया गया, जिनके गले में इसी तरह इंफेक्शन के प्रारंभिक लक्षण मिले. सभी को दवा दिया गया है. चिरायु दल व स्थानीय अमला बच्चों के ठीक होने तक मॉनिटरिंग करेंगे।

स्कूल प्रबंधन से भोजन के मीनू में 5 दिनों तक बदलाव कर बच्चों को दलिया खिलाने को कहा गया है. परिसर में मौजूद हैंडपंप का पानी उपयोग नहीं करने की सलाह प्रबंधन व पालकों को दिया गया है।

लाल घेरे के बावजूद उक्त स्कूल परिसर के हैंडपंप के पानी का उपयोग बच्चे ला रहे थे. जानकारी मिलने के बाद बीएमओ भारती ने पीएचई एसडीओ बीआर टंटन से चर्चा कर जानकारी ली. टंडन ने बताया कि धूपकोट स्कूल के पंप में 2.42 पीपीएम फ्लोराइड की मात्रा पाई गई जो मानक से ढाई गुना ज्यादा है, लाल घेरा लगाकर पीने के लिये मना किया गया था. इसके विकल्प के तौर पर नहर किनारे 200 मीटर दूरी पर स्थित पंप के पानी इस्तेमाल के लिये कहा गया था।

डेढ़ साल पहले हुए जांच में ब्लॉक के 62 स्कूलों के पानी को दूषित बता कर पीने के लिए मना किया गया है. अधिकतम 6 पीपीएम तक फ्लोराइड एवं 4.8 पीपीएम आयरन की मात्रा स्कूलों के जल स्रोत में मिली है. विभाग पंपो पर लाल निशान लगाकर पीने के लिये मना किया है पर विकल्प में कोई दूसरी ब्यवस्था नहीं किया है टंडन ने बताया कि सभी प्रभावित स्कूलों में वाटर रिमूवल प्लांट लगाने प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है, स्वीकृति का इंतजार है।

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