बिलासपुर। Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रायगढ़ जिले से जुड़े एक चर्चित तलाक मामले में फैमिली कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए दोबारा सुनवाई के आदेश दिए हैं। मामला पति द्वारा पेश किए गए सीसीटीवी फुटेज और पत्नी द्वारा लगाए गए निजता उल्लंघन के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है।
यह मामला रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र का है। महासमुंद जिले की रहने वाली महिला की शादी वर्ष 2012 में रायगढ़ निवासी युवक से हुई थी। पति निजी कंपनी में कार्यरत है, जिसके चलते दंपती तमनार में रह रहे थे। वर्ष 2015 में उनके एक पुत्र का जन्म हुआ। वर्ष 2017 में पत्नी मायके गई और इसके बाद वापस नहीं लौटी।

पत्नी ने पति पर मारपीट और दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए भरण-पोषण (मेंटेनेंस) का केस दायर किया। इसके जवाब में पति ने फैमिली कोर्ट में क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक की याचिका दायर की थी।
पति का आरोप है कि पत्नी के अन्य पुरुषों से अनैतिक संबंध थे और वह न्यूड वीडियो कॉल व अश्लील चैटिंग करती थी। सबूत के तौर पर पति ने बेडरूम में लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज को सीडी के माध्यम से कोर्ट में पेश किया। हालांकि फैमिली कोर्ट ने इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को नजरअंदाज करते हुए तलाक याचिका खारिज कर दी थी।
इसके खिलाफ पति ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने माना कि इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच आवश्यक है और फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए मामले को पुनः सुनवाई के लिए वापस भेज दिया।
वहीं पत्नी ने पति पर बिना सहमति के बेडरूम में कैमरा लगाने, निजता के उल्लंघन, मारपीट और दहेज प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों के आरोपों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।
इस मामले को निजता के अधिकार, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की वैधता और वैवाहिक क्रूरता की परिभाषा से जोड़कर देखा जा रहा है। अगली सुनवाई अब फैमिली कोर्ट में होगी।
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