CG Politics : बस्तर संभाग जगदलपुर धरमपुरा में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार मनरेगा योजना का नाम बदलने के बहाने मजदूरों के अधिकार को खत्म करना चाहती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने मजदूरों को रोजगार का अधिकार प्रदान यह योजना लाई थी ।

पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए सरकार ने जो मनरेगा योजना चालू की थी, उसे अपने पूंजीपति मित्रों को खुश करने के लिए केंद्र सरकार बंद करने जा रही है। उन्होंने कहा कि मनरेगा केंद्रीय कानून था, 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार द्वारा भेजे जाते थे, अब के राज्य का हिस्सा 60- 40 का हो जाएगा, पहले मैचिंग ग्रांट 50 प्रतिशत राशि राज्य करेगी तब केंद्र सरकार राशि जारी करेगा, राज्यों की वित्तीय स्थिति सर्वविदित है। इन से आने वाले समय में मनरेगा स्कीम खत्म हो जाएगी। जैसे ही बजट का बोझ राज्य स पर पड़ेगा, वैसे ही धीरे-धीरे मनरेगा बंद होने लगेगी।
दीपक बैज ने कहा कि मोदी सरकार अब राज्यों पर “जी राम जी” का लगभग 50,000 करोड़ का बोझ चाहती है, उन्हें 40 प्रतिशत खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। मनरेगा योजना देश के गरीब से गरीब लोगों के लिए रोजगार का सहारा थी, जो जैसे मुश्किल हालातों में भी उनके साथ थी। इसलिए ये बिल गरीब मजदूरों के खिलाफ है।
100 दिन से 125 दिन की मजदूरी वाली बात सिर्फ एक चालाकी है, वर्तमान में छत्त के 70 प्रतिशत गांव में भाजपा की सरकार आने के बाद से अघोषित तौर पर काम नह जा रहा है। पिछले 11 सालो में मोदी सरकार बनने के बाद मनरेगा में काम देने का औसत मात्र 38 दिनों का है। मतलब 11 सालो में मोदी सरकार किसी भी साल 10 काम नहीं दे पाई।


