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आलेख- राममंदिर जन्मभूमि का फैसला सर्वोच्च न्यायालय ने दिया फिर सवाल क्यों – डॉ. चंद्रकांत रामचंद्र वाघ

असदुद्दीन ओवैसी जी सप्रेम नमस्कार आप इस देश के एक अल्प संख्यक समुदाय के जाने माने नेता और सांसद है तो आपकी जिम्मेदारी भी इतनी ही महती है जिससे आप भी भलीभांति परिचित हैं । उल्लेखनीय है कि आप एक कानून के ज्ञाता और बैरिस्टर भी है । इसलिये आप जो करते हैं और बोलते है उसके हर पहलू से आप बखुबी वाकिब रहते है । पर इसके बाद भी आप की गतिविधियों को आप धर्मनिरपेक्षता का चोला ओढाकर अच्छे से उसे क्रियान्वयन मे लाते है । दुर्भाग्य से इस देश का कानून इतना सशक्त होने के बाद भी कभी-कभी राजनीति के हतथे चढ जाता है । इसलिये कई बार इसी के चलते जीते जी भी इंसाफ नहीं मिलता । कुल मिलाकर कानून का अमलीजामा पूरी तरह दरबार पर ही आश्रित रहता है । इसका उदाहरण सुशांत सिंह राजपूत के केस में भी दिख रहा है ।

Dr. Chandrakant wagh

खैर विषयानंतर हो रहा है मूल मुद्दे पर एक कानून के ज्ञाता होने से इस बात से आप भी इंकार नहीं कर सकते कि राममंदिर जन्मभूमि का फैसला सर्वोच्च न्यायालय के पूरी बैंच ने सर्वानुमति से दिया । यह सबसे लंबे चलने वाला केस रहा है । जब तक यह केस चला तब तक हर पक्ष ने इसे स्वीकारने की बात की । पर आज भी ऐसे महसूस होता है कि देश के अल्प संख्यक वर्ग ने इस फैसले को सर आंखों पर लेकर माना है । वही तो जहां अयोध्या के मामले के पक्षकार इकबाल अंसारी ने भी जिस दिन निर्णय आया उसी दिन उनहोंने कह दिया कि मामला खत्म हो गया । वही शिलान्यास मे भी वे सादर आमन्त्रित हैं । वहीँ बहुत से मुसलिम भाई भी इस आयोजन में शिरकत करना चाहते हैं । वहीं एक मुसलमान भाई ने आजमखान ने उन्हे न बुलाने पर आत्म हत्या करने तक की धमकी दी है । वही फैजखान ने कौशल्या माता के चंदखुरी से पैदल वहां की मिट्टी अयोध्या लेकर जा रहे है । ऐसे माहौल में आपके वयकतवय दुर्भाग्य पूर्ण है । जिस अपेक्षा की उम्मीद आप प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी से करते हैं तो पहले आपको भी उसे अपने आचरण मे उतारने की आवश्यकता है । अगर आप एक सांसद है जनप्रतिनिधि है तो आप भी अपने क्षेत्र के हर वर्ग के प्रतिनिधि है ऐसे हालात में जिस बाध्यता की उम्मीद प्रधानमंत्री की है उतनी आपकी भी है । जब आप एक मसजिद के शिलान्यास कर सकते हैं तो फिर आप नैतिक रूप से यह बात उठाने के हकदार नहीं है । आपने एक महत्वपूर्ण बात यह कहीं है है कि हम अपने आने वाले पीढी को मस्जिद को शहीद करने की बात बताने कि की है । फिर आपको तो पूरी बात बतानी चाहिए । कि बाबर कैसे आया उसने लूटपाट की मंदिर को तोड़ कर मस्जिद बनाये । फिर यहां से वो लूटकर चला गया । दूर क्यो जाते है हैदराबाद के निजाम इस देश में मिलना नहीं चाहते थे आखिर कार लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के सामने हथियार डाल दिये थे । क्या कारण है कि विश्व में कहीं भी चर्च और मंदिर साथ मे नही है । फिर यह देश पहले हिंदूओ का था तो पहले मंदिर ही रहा होगा । इस देश में जितने भी मसजिद बने है सब पंद्रह शताब्दी के बाद के ही है । यही कारण है कि यह सब निर्माण पांच सौ साल पूर्व के ही है । आज भी जैसे पाकिस्तान से खबरें आ रही हैं कि गुरूद्वारा को तोड़कर मस्जिद बनाने की खबरें आ रही हैं । वहीं इस्लामाबाद मे भी कृष्ण मंदिर के नींव को तोड़ने का समाचार पूरे देश ने देखा है । वहीं अफगानिस्तान में बुद्ध की प्रतिमाएँ बम से उड़ा दी गई । यह तो सब अभी के समाचार है । वही आज से पाँच-छह साल पहले रोंहिगया मुसलमान के नागरिकता के लिए पूरे मुंबई में तोडफोड देखा है । वहीं आपके छोटे भाई अकबरूददीन का वो बयान कि पंद्रह मिनट के लिए पुलिस हटा लो यह मानसिकता को कैसे आप धर्मनिरपेक्षता के अनुकूल समझते यह समझ से परे है । यह सब आपके राजनीति का हिस्सा है पर इसके दूरगामी परिणाम से आप भी परिचित हैं । अच्छा होता आप भी देश के मुख्यधारा में आते । आपसे सनम्र अनुरोध है कि आप जमकर राजनीति करे मोदी जी को हर मुद्दे पर घेरे कम से कम देश का तो फायदा हो । पर राजनीति सांप्रदायिक सौहार्द के मूल्यों पर हो वो न देश हित में न जनहित मे । जब ऐसे मुद्दे जो भविष्य की गर्त में चले गये है उसको बनाये रखने की कोशिश करना एक जिम्मेदार राजनेता के लिए अनुकूल नहीं है । अब हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी है कि हम देश में वो माहौल लाने के लिए प्रतिबद्ध हो जो इस देश की संस्कृति की रूह रही है । जब यह देश ही स्वीकार रहा है कि बगैर मुस्लिम कैसा भारत । फिर सियासत के लिए । यह वही देश है जहां भारत रत्न स्व.बिसमिललाह खान की शहनाई स्व. मोहम्मद रफ़ी साहब के गानों को प्यार दिया वहीं शहीद अब्दुल हमीद के शौर्य पर नतमस्तक हो गया । वहीं वैज्ञानिक व पूर्व राष्ट्रपति स्व. डा. अबुल कलाम आजाद के धर्म निरपेक्षता के इस पर पूरा देश कायल हो गया । दूर कहा जा रहे है बेहतरीन कलाकार स्व.इरफान खान के निधन पर लोग शोकमगन हो गए । आप समुदाय की राजनीति करने के बदले पूरे देश की राजनीति करे आप एक सीमीत जगह की राजनीति करने के बदले पूरे देश को अपना क्षेत्र माने । आप राजनीति की नजीर बदले आपकी सोच अगर पूरे समाज समुदाय पूरा देश होता है तो आप इस देश को बाध्य करने मे सक्षम हो कि आप आगे कभी जाकर इस देश के वो प्रथम हिंदू स्तानी मुसलिम होंगें जो प्रधानमंत्री बनने का हक योग्यता के आधार पर रखते है । पर इसके लिए आपको बहुत कुछ छोडना पडेगा जो आपके लिए दुश्वारी काम है । बस आपसे एक ही अनुरोध आप कितना भी मतभेद रख ले लड ले पर हम सबको एक दूसरे के साथ ही इसी देश में रहना है तो फिर मिल जुलकर रहने मे ही हमारी भलाई है । यही कारण है कि आज पाकिस्तान के नागरिक भी भारतीय बनने की इच्छा रखते हैं और बन भी गये है उदाहरण सामने है गायक अदनान सामी । सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया बात खत्म । इमामे हिंद राम के वजूद को सबने स्वीकारा है तो फिर विवाद की गुंजाइश कहां । पर मै आपको बता दूं कि मै आपके योग्यता का कायल हू । बस इतना ही
डा . चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ

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