राशिफल - अध्यात्म

शिव की आराधना से पाएं कालसर्प दोष से मुक्ति, पवित्र सावन मास शुरू

शिव की विशेष आराधना के लिए सावन मास का शुभारंभ 17 जुलाई से हो रहा है। सावन माह में शिवभक्ति का विशेष महत्व है। माना जाता है कि भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कहा जाता है कि सावन माह में पड़ने वाले चारों सोमवार को पूजा-पाठ और रुद्राभिषेक से विशेष लाभ मिलता है। इसके अलावा नागपंचमी पर कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए सावन माह सबसे उत्तम माना गया है।

17 जुलाई से शुरू होने वाले सावन माह में इस बार चार सोमवार पड़ेंगे। 30 जुलाई को शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। सावन मास पूर्ण रूप से भगवान शिव को समर्पित है, जिसमें भगवान शिव की विशेष पूजा होती है तथा भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इसके अलावा सावन मास नाग पंचमी पर कालसर्प दोष की शांति के लिए सबसे उत्तम है।

सबसे खास बात यह है कि जनपद में पुरा गांव में प्रसिद्ध एवं ऐतिहासिक परशुरामेश्वर महादेव मंदिर में शिवरात्रि पर जहां तीन दिवसीय मेला आयोजित होता है। वहीं लाखों कांवड़िये और शिवभक्त जलाभिषेक करते हैं। इसके लिए मंदिरों में पूरी तैयारी कर ली गई है।

बागपत के पक्काघाट मंदिर के प्रभारी एवं ब्रह्मचारी दिव्यानंद महाराज, ज्योतिषाचार्य राजकुमार शास्त्री व साहित्याचार्य नीरज शास्त्री का कहना है कि श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार का विशेष महत्व है। शिवभक्तों को चाहिए कि इस दिन विधि-विधान से शिव की पूजा कर आशीर्वाद लें। वहीं सावन मास में रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है।

दूध से अभिषेक करने पर पुत्र, गन्ने के रस से स्थिर लक्ष्मी, दही से पशु स्वस्थ रहने की मनोकामना पूर्ण होती है। बताया कि सावन माह युवतियों के लिए विशेष है। लड़कियों को शिव की पूजा करने से मनचाहे जीवन साथी की प्राप्ति होती है। शिवरात्रि में रात्रि जागरण अवश्य करें, इससे जीवन में आयु, आरोग्य ऐश्वर्य के सुख शांति की पाप्ति होती है।

ज्योतिषाचार्य ने बताया कि सावन मास में सोमवार का विशेष महत्व है। शिव महापुराण के अनुसार शिव की उपासना और व्रतधारी को ब्रह्मा मुहूर्त में उठकर पानी में कुछ काले तिल डालकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद भगवान शिव का अभिषेक जल/गंगाजल से करें।

इसके अलावा विशेष अवसर पर मनोकामना की पूर्ति के लिए दूध, दही, घी, शहद, चने की दाल, सरसों तेल, काले तिल आदि सामग्रियों से अभिषेक की विधि-विधान से पूजा करें और ओम नम: शिवाय मंत्र का उच्चारण करें। सफेद फूल, सफेद चंदन, चावल, पंचामृत, सुपारी, फल और गंगाजल से भगवान शिव और पार्वती का पूजन करें। इसके साथ शंकर भगवान पर भांग, धतूरा, बेलपत्र और भस्म इत्यादि चढ़ाना भी अति उत्तम होता है।

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