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नवरात्रि में ऐसे करें कलश स्थापना, इस मंत्र का स्थापना में करें प्रयोग, पूर्ण होगी सर्वमनोकामना

नवरात्रि के पर्व का हिंदू धर्म में काफी महत्व है, साल में इस पर्व को दो बार मनाया जाता है। पहला चैत्र नवरात्रि तो दूसरा शारदीय नवरात्रि इस साल शारदीय नवरात्रि 10 अक्टूबर से शुरू हो रही है जो कि 18 अक्टूबर तक चलेगी. इस दौरान नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा अर्चना की जाती है और व्रत भी रखा जाता है। नवरात्र में उपवास की शुरुआत करने के पहले कलश स्थापना भी किया जाता है।

आइए जानते हैं नवरात्रि में कलश स्थापना कैसे करें…

माना जाता है कि व्रत रखने से मां दुर्गा को प्रसन्न किया जा सकता है. नवरात्रि के पहले दिन घर में कलश स्थापित किया जाता है। कलश स्थापना के लिए सबसे पहले एक कलश की जरूरत पड़ेगी। कलश सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी हो सकता है. इसके अलावा कलश स्थापना के लिए सामग्री में नारियल, मौली, धुले हुए 5/7/11 आम के पत्ते, रोली, शुद्ध जल और गंगा जल, केसर, जायफल, सिक्का, चावल और गेहूं की जरूरत होगी।

ऐसे करें स्थापित –

कलश स्थापना करने से पहले ये ध्यान रखें कि जिस जगह कलश स्थापित किया जाएगा वो जगह साफ होनी चाहिए उस जगह के आस-पास भी किसी तरह की कोई गंदगी नहीं होनी चाहिए। अब कलश स्थापना करने के लिए एक लकड़ी का पाटा लें और उस पर नया और साफ लाल कपड़ा बिछाएं. अब नारियल और कलश पर मौली बांधे, रोली से कलश पर स्वास्तिक बनाएं।

कलश स्थापना के लिए सामग्री

-एक घड़ा या पात्र
-घड़े में गंगाजल मिश्रित जल ( जल आधा न हो, केवल तीन उंगली नीचे तक जल होना चाहिए)
-घड़े या पात्र पर रोली से ऊं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे लिखें या ऊं ह्रीं श्रीं ऊं लिखें
-घड़े पर कलावा बांधें। यह पांच, सात या नौ बार लपटें
-घड़े पर कलावा में गांठ न बांधें
-कलावा यदि लाल और पीला मिलाजुला हो तो बहुत अच्छा
-जौं
-काले तिल
-पीली सरसो
-एक सुपारी
-तीन लौंग के जोड़े ( यानी 6 लोंग)
-एक सिक्का
-आम के पत्ते (नौ)
-नारियल ( नारियल पर चुन्नी लपेटे)
-एक पान

वहीं कलश में शुद्ध जल और गंगा जल रखें और जल में केसर, जायफल और सिक्का डालें. इसके अलावा एक मिट्टी के बर्तन में जौ भी बो सकते हैं। इसी बर्तन पर जल से भरा हुआ कलश रखें. हालांकि इस दौरान ध्यान देने वाली बात है कि कलश का मुंह खुला न छोड़ें. उसे ढ़क दें. वहीं अगर कलश को किसी ढक्कन से ढका है तो उसे चावलों से भर दें और उसके बीचों-बीच एक नारियल भी रखें. इसके बाद दीप जलाएं और कलश की पूजा करें।

कलश स्थापना के लिए मंत्र इस प्रकार है….

नमस्तेsतु महारौद्रे महाघोर पराक्रमे।।
महाबले महोत्साहे महाभय विनाशिनी

स्थापना का शुभ मुहूर्त

शुभ चौघड़िया मुहूर्त में कलश स्थापना अति उत्तम प्रभाव वाला है। घट स्थापना का शुभ समय ज्योतिषविदों के अनुसार 6 अप्रैल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानि के पहले नवरात्रे वाले दिन सुबह 8 से 10 बजे के बीच स्थिर लगन चल रही होगी और 8 बजे से 9 : 30 बजे के बीच शुभ चौघड़िया मुहूर्त भी चल रहा होगा।

कलश स्थापना पर ध्यान रखें

-प्रतिदिन कलश की पूजा करें। हर नवरात्रि की एक बिंदी कलश पर लगाते रहें
-यदि किसी दिन दो नवरात्रि हैं तो दो बिंदी (रोली की) लगाते रहें
-कलश की पूजा हर दिन करते रहें और आरती भी करें।

इनकी होती है पूजा

बता दें कि नवरात्र के नौ दिनों में एक-एक दिन मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चन्द्रघंटा, मां कूष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी, मां सिद्धदात्री की पूजा की जाती है. शक्तिस्वरूपा मां दुर्गा की आराधना महिलाओं के अदम्य साहस, धैर्य और स्वयंसिद्धा व्यक्तित्व को समर्पित है।

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