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Amala Navami 2019 -जानिये कब है आंवला नवमी, उसकी तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

आंवला नवमी का त्योहार कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने अपनी सभी बाल लीलाओं का त्याग करके अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़े थे।

इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने गोकुल का त्याग करके मथुरा की और प्रस्थान किया था तो आइए जानते हैं आंवला नवमी 2019 में कब है , आंवला नवमी शुभ मुहूर्त, महत्व, पूजा विधि और आंवला नवमी की कथा –

आंवला नवमी 2019 तिथि में 5 नवंबर 2019 को है
आंवला नवमी 2019 शुभ मुहूर्त – अक्षय नवमी पूजा का समय – सुबह 6 बजकर 36 मिनट से दोपहर 12 बजकर 4 मिनट तक (5 नवंबर 2019)
नवमी तिथि प्रारम्भ- सुबह 4 बजकर 57 मिनट से (5 नवंबर 2019)
नवमी तिथि समाप्त- अगले दिन सुबह 7 बजकर 21 मिनट तक (6 नवंबर 2019)

आंवला नवमी का त्योहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व दिवाली के बाद आता है। आंवला पूजा परिवार और दोस्तों के साथ की जाती है। इस त्योहार को अक्षय नवमी के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व उत्तर भारत और मध्य भारत में मनाया जाता है।

माना जाता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण गोकुल छोड़कर अपने कर्तव्य को पूरा करने के लिए मथुरा गए थे। आंवला नवमी की पूजा महिलाएं संतान सुख और परिवारिक सुख के लिए की जाती है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा की जाती है। आंवला नवमी के दिन भगवान श्री कृष्ण ने अपने सभी बाल लीलाओं का त्याग किया था।

पुराणों के अनुसार इसी दिन द्वापर युग का प्रारंभ हुआ था। इसके अलावा यह भी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने कुष्माण्डक नाम के राक्षस का वध किया था और उसके शरीर से कुष्माण्ड की बेल निकली थी। इसी कारण से इस दिन कुष्माण्ड का दान भी किया जाता है।

शास्त्रों के अनुसार आंवला का वृक्ष भगवान विष्णु का स्वरूप माना गया है। इसके अलावा आंवला, पीपल, वटवृक्ष, शमी , आम और कदम्ब के वृक्ष को चारों पुरुषार्थों को प्राप्त कराने वाला कहा गया है। आंवला नवमी के दिन पूजा करने से गोदान का फल का प्राप्त होता है।

आंवला नवमी के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और साफ वस्त्र धारण करती हैं। इस दिन आंवला के पेड़ की पूजा की जाती है और उसी पास बैठकर भोजन भी किया जाता है। इसके पश्चात आंवला के पेड़ के नीचे पूर्व दिशा की और मुख करके बैंठें। इसके पश्चातआंवला के पेड़ पर दूध चढ़ाएं और उसके तने पर कच्चे सूत का धागा बांधें और मेंहदी, चूड़ी या सिंदूर आदि किसी भी चीज का चुनाव करके आंवले के पेड़ पर चढ़ाएं। इसके पश्चात आंवले के वृक्ष का तिलक करके उसे अक्षत अर्पित करें और धूप व दीप से वृक्ष की पूजा करें। इसके पश्चात आंवला के वृक्ष की 108 परिक्रमा करें। यदि आप 108 परिक्रमा न कर पाएं तो 8 परिक्रमा करके हाथ जोड़ लें। इसके पश्चात आंवला नवमी की कथा ध्यान पूर्वक सुने।

इसके पश्चात आंवला के वृक्ष के नीचे बैठकर ही भोजन करें और भोजन में आंवले का प्रयोग अवश्य करें। भोजन करते समय अपना मुख पूर्व दिशा की और ही रखें। आंवला नवमी के दिन किसी ब्राह्मणी औरत को सुहाग का समान, खाने की चीजें और कुछ दक्षिणा दान में अवश्य दें। आवंला नवमी के दिन सोने चांदी का दान करने पर उसका छ: गुना फल मिलता है और यदि संभव हो तो इस दिन सोने और चांदी का दान अवश्य करें।

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