गरियाबंद। मैनपुर वन परिक्षेत्र में जंगली हाथियों के झुंड ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ओडिशा की ओर से पहुंचे करीब 30 से 35 हाथियों के दल ने फरसरा, दबनई, छिंदौला और लेडीबहार क्षेत्र के खेतों में घुसकर धान की खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। लगातार फसल बर्बाद होने और हाथियों के आतंक से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा उस वक्त फूट पड़ा, जब वन विभाग की टीम नुकसान का जायजा लेने गांव पहुंची।
खेतों में घुसकर फसलों को कर रहे बर्बाद
मैनपुर से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित इन गांवों में पिछले कई दिनों से हाथियों की गतिविधियां बनी हुई हैं। ग्रामीणों के मुताबिक शाम ढलते ही हाथियों का झुंड खेतों की ओर पहुंच जाता है और तैयार धान की फसल को रौंदकर बर्बाद कर देता है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि इस समय धान की फसल खेतों में तैयार हो रही है और ऐसे वक्त में हाथियों का झुंड लगातार फसल को नुकसान पहुंचा रहा है। हाथियों की मौजूदगी के कारण ग्रामीणों में डर का माहौल भी बना हुआ है।
निरीक्षण करने पहुंचे वन अधिकारी, ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
फसलों को हुए नुकसान की शिकायत मिलने के बाद मैनपुर वन परिक्षेत्र अधिकारी आरके साहू स्थानीय वन अमले के साथ प्रभावित खेतों का निरीक्षण करने पहुंचे। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों के सामने जमकर नाराजगी जताई।
ग्रामीणों ने कहा कि केवल नुकसान का निरीक्षण और पंचनामा बनाने से उनकी समस्या का समाधान नहीं होगा। हाथियों के झुंड को जल्द से जल्द खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों से दूर खदेड़ने के लिए ठोस व्यवस्था की जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि हाथियों के आतंक से राहत नहीं मिली और किसानों को उचित मुआवजा नहीं दिया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने इस मामले को लेकर वन मंत्री से मुलाकात करने की बात भी कही।
मुआवजे को लेकर भी किसानों में नाराजगी
ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों के कारण हर साल क्षेत्र में धान और मक्का की फसलों को नुकसान पहुंचता है, लेकिन किसानों को नुकसान के मुकाबले पर्याप्त मुआवजा नहीं मिल पाता। किसानों का कहना है कि मुआवजे की प्रक्रिया में लंबा समय लगने के साथ कई बार उन्हें अपेक्षाकृत कम राशि मिलती है।
ग्रामीणों ने मांग की कि इस बार नुकसान का सही आकलन कर प्रभावित किसानों को तत्काल और उचित मुआवजा दिया जाए।
हाथियों के डर से रात में रतजगा
ग्रामीणों के मुताबिक हाथियों के झुंड के लगातार क्षेत्र में घूमने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। शाम होते ही लोग खेतों की ओर जाने से बच रहे हैं। कई ग्रामीण हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए रात में रतजगा करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर हाथियों का झुंड इसी तरह खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास घूमता रहा तो फसल के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा पर भी खतरा बना रहेगा।
वन विभाग ने दिया उचित मुआवजे का आश्वासन
ग्रामीणों की नाराजगी के बाद वन परिक्षेत्र अधिकारी आरके साहू ने उन्हें समझाया और नुकसान का आकलन कर नियमानुसार मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि फसलों को हुए नुकसान का आंकलन किया जा रहा है और इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।
वन परिक्षेत्र अधिकारी ने बताया कि वन विभाग और हाथी मित्र दल की टीम लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रही है। टीम हाथियों की लोकेशन और उनकी गतिविधियों पर निगरानी बनाए हुए है, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
ग्रामीणों को अब कार्रवाई का इंतजार
अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ, लेकिन क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी को लेकर चिंता अभी भी बनी हुई है। किसानों की मांग है कि वन विभाग केवल नुकसान का आंकलन करने तक सीमित न रहे, बल्कि हाथियों को खेतों और आबादी वाले इलाकों से दूर रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए।
फिलहाल वन विभाग नुकसान का आंकलन करने में जुटा है और प्रभावित किसानों को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई है। वहीं, हाथियों के झुंड की मौजूदगी के कारण मैनपुर क्षेत्र के फरसरा, दबनई, छिंदौला और लेडीबहार में दहशत का माहौल बना हुआ है।
Report – Girish gupta, special correspondent, Gariaband

