गिरीश गुप्ता गरियाबंद/मैनपुर। जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत उरमाल में विकास कार्यों और शासकीय राशि के कथित दुरुपयोग को लेकर विवाद गहरा गया है। जनपद सदस्य डॉ. योगी राज माखन कश्यप ने पंचायत के विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितता, कथित फर्जी बिलों और सरकारी राशि के नियम विरुद्ध भुगतान का आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। वहीं ग्रामीणों ने भी पूरे मामले की जांच नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
जनपद सदस्य का आरोप है कि पंचायत में सड़क संधारण, मुरुम बिछाने, तालाब सफाई एवं गहरीकरण, निर्माण सामग्री की खरीदी और शौचालय निर्माण सहित विभिन्न कार्यों के नाम पर बड़ी मात्रा में राशि का आहरण किया गया है। उनका दावा है कि इन भुगतानों से जुड़े कई दस्तावेजों में पक्के बिल की जगह हस्तलिखित पर्चियां और कैश-मेमो का इस्तेमाल किया गया है।
कच्चे बिल और कैश-मेमो को लेकर उठे सवाल
मामले में सामने आए बताए जा रहे दस्तावेजों में पदमन ध्रुव कृषि ट्रेड्स, नरेश पटेल कृषि फार्म और बिसी ट्रेडर्स सहित कुछ फर्मों के नाम का उल्लेख है। जनपद सदस्य का दावा है कि इन फर्मों से संबंधित कुछ बिलों में जीएसटी संबंधी विवरण और आवश्यक औपचारिकताओं को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
आरोप है कि सड़क संधारण और मुरुम बिछाने जैसे कार्यों के नाम पर अलग-अलग तिथियों में करीब 1.10 लाख रुपये से लेकर 1.58 लाख रुपये तक के बिलों के आधार पर भुगतान किया गया। जनपद सदस्य ने इन दस्तावेजों की जांच कर यह पता लगाने की मांग की है कि संबंधित कार्य वास्तव में मौके पर हुए या नहीं और यदि हुए तो उनकी गुणवत्ता एवं लागत क्या थी।
तालाब सफाई और गहरीकरण के भुगतान पर भी सवाल
ग्राम पंचायत के तालाबों की सफाई और गहरीकरण के नाम पर किए गए कथित भुगतानों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। जनपद सदस्य का आरोप है कि कुछ कार्यों को दस्तावेजों में दर्शाकर राशि का भुगतान किया गया, जबकि मौके पर कार्य की वास्तविक स्थिति अलग है।
उन्होंने मांग की है कि संबंधित तालाबों का भौतिक सत्यापन कराया जाए और भुगतान से जुड़े मस्टर रोल, बिल, वाउचर, तकनीकी स्वीकृति तथा कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्रों की जांच की जाए।
सामग्री खरीदी में कथित अनियमितता
निर्माण एवं रखरखाव सामग्री, पाइप, रॉड सहित अन्य सामान की खरीदी के नाम पर भी भुगतान को लेकर आरोप लगाए गए हैं। जनपद सदस्य के अनुसार, कुछ भुगतान पदमन ध्रुव ट्रेडर्स, उरमाल सहित अन्य नामों से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर किए गए।
उनका दावा है कि जिन सामग्रियों की खरीदी दिखाई गई है, उनकी वास्तविक उपलब्धता और उपयोग का भौतिक सत्यापन कराया जाना जरूरी है। उन्होंने संबंधित बिलों और स्टॉक रजिस्टर का मिलान कराने की मांग की है।
15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग पर भी सवाल
जनपद सदस्य डॉ. माखन कश्यप ने 15वें वित्त आयोग सहित पंचायत को मिलने वाली अन्य मदों की राशि के उपयोग को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार गिट्टी, मुरुमीकरण, सड़क संधारण और शौचालय निर्माण जैसे कार्यों के नाम पर लाखों रुपये के भुगतान किए जाने की जानकारी सामने आई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर शौचालय निर्माण कागजों में दिखाया गया, जबकि मौके पर वास्तविक निर्माण की स्थिति की जांच आवश्यक है। इसके अलावा जियो-टैगिंग से संबंधित रिकॉर्ड में भी कथित गड़बड़ी की जांच की मांग की गई है।
गैर-जीएसटी फर्मों और निजी खातों में भुगतान का आरोप
जनपद सदस्य ने आरोप लगाया कि पंचायत की शासकीय राशि के भुगतान में नियमों का पालन नहीं किया गया। उनका दावा है कि कुछ मामलों में गैर-जीएसटी फर्मों अथवा निजी व्यक्तियों से जुड़े खातों में राशि ट्रांसफर की गई।
उन्होंने पंचायत के बिल-वाउचर, बैंक स्टेटमेंट, भुगतान रजिस्टर और संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सरकारी राशि किन खातों में और किस कार्य के एवज में भेजी गई।
बिलों पर आवश्यक हस्ताक्षर नहीं होने के आरोप भी लगाए गए हैं। इस संबंध में डिजिटल सिग्नेचर (DSC) के माध्यम से भुगतान किए जाने की प्रक्रिया की भी जांच की मांग की गई है।
पंचायत के आय-व्यय के हिसाब पर भी सवाल
जनपद सदस्य के मुताबिक पंचायत को विभिन्न स्रोतों से प्राप्त होने वाली आय, जैसे बाजार ठेका, नल-कर, जल-कर, मकान-कर और एनओसी आदि का भी व्यवस्थित लेखा-जोखा होना चाहिए। उनका आरोप है कि पंचायत के आय-व्यय और बही-खाते के रखरखाव में भी गंभीर अनियमितताएं हैं।
उन्होंने पंचायत के कैशबुक, लेजर, रसीद बुक, बैंक पासबुक, भुगतान रजिस्टर और अन्य वित्तीय दस्तावेजों का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की है।
पहले भी रिकवरी का मामला सामने आने का दावा
जनपद सदस्य ने दावा किया कि पंचायत में इससे पहले भी करीब 13 लाख रुपये की रिकवरी से संबंधित मामला सामने आया था। उनका कहना है कि इस संबंध में उन्होंने जिला पंचायत के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर चंद्राकर से चर्चा कर आवेदन भी दिया था।
हालांकि, जनपद सदस्य का आरोप है कि अब तक उक्त राशि की पूरी वसूली नहीं हो सकी है और मामले में अपेक्षित कार्रवाई भी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यदि पुराने मामलों में कार्रवाई नहीं होगी तो इससे पंचायत स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं को बढ़ावा मिल सकता है।
प्रशासनिक कार्रवाई पर ग्रामीणों की नजर
मामले के सामने आने के बाद अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। ग्रामीणों और जनपद सदस्य ने मांग की है कि पंचायत के पिछले कुछ वर्षों के सभी विकास कार्यों और वित्तीय लेन-देन की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
जांच के दौरान विशेष रूप से बिल-वाउचर, बैंक लेन-देन, जीएसटी विवरण, कार्यादेश, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका (MB), मस्टर रोल, जियो-टैगिंग रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन कराया जाए।
जांच नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। ग्रामीणों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर सड़क पर उतरकर प्रदर्शन और चक्काजाम किया जाएगा।
वहीं जनपद सदस्य डॉ. योगी राज माखन कश्यप ने भी कहा है कि यदि मामले में जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे इसे उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाएंगे।
अब प्रशासन की जांच से सामने आएगा सच
उरमाल पंचायत को लेकर लगाए गए आरोप फिलहाल जांच का विषय हैं। आरोपों की वास्तविकता तभी स्पष्ट होगी जब संबंधित दस्तावेजों की जांच के साथ-साथ मौके पर कराए गए कार्यों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। ऐसे में अब महत्वपूर्ण यह होगा कि जिला प्रशासन और जनपद पंचायत मैनपुर इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
यदि जांच में वित्तीय अनियमितता या शासकीय राशि के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई और राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। वहीं यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो प्रशासन की जांच से स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।

