New CDS: नई दिल्ली: निवर्तमान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने अपने कार्यकाल को बेहद संतोषजनक और उपलब्धियों से भरा बताया। शनिवार को तीनों सेनाओं की ओर से दिए गए गार्ड ऑफ ऑनर के बाद उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च सैन्य पद पर रहते हुए उनका मुख्य लक्ष्य थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना था। उन्होंने कहा कि वर्दी में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर अंतिम बार पुष्पचक्र अर्पित करना उनके लिए भावुक क्षण रहा।
ऑपरेशन सिंदूर और सैन्य सुधारों में निभाई अहम भूमिका
सितंबर 2022 में सीडीएस का पद संभालने वाले जनरल चौहान ने अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण सैन्य पहलों का नेतृत्व किया। उन्होंने तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ मिलकर ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति और उसके क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभाई। बदलते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए उन्होंने संयुक्त सैन्य क्षमता बढ़ाने और सेनाओं के बीच तालमेल मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। साथ ही थिएटराइजेशन मॉडल के तहत एकीकृत सैन्य कमानों के गठन की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए।
सैन्य करियर में हासिल किए कई सम्मान
1981 में 11 गोरखा राइफल्स में कमीशन प्राप्त करने वाले जनरल चौहान ने जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। बालाकोट एयर स्ट्राइक के समय वह सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO) थे। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, सेना पदक और विशिष्ट सेवा पदक सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
कौन होंगे भारत के अगले सीडीएस?
रविवार से लेफ्टिनेंट जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पदभार संभालेंगे। भारतीय सेना में लंबे अनुभव वाले राजा सुब्रमणि कई अहम कमान और रणनीतिक जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। उन्हें संयुक्त सैन्य संचालन, राष्ट्रीय सुरक्षा और आधुनिक युद्ध रणनीतियों का गहरा अनुभव माना जाता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में थिएटराइजेशन और तीनों सेनाओं के एकीकरण की प्रक्रिया को और गति मिल सकती है।

