नितेश राणे (Photo Credits: IANS)
मुंबई, 25 मई: महाराष्ट्र की राजनीति (Maharashtra Politics) में सोमवार को उस समय भूचाल आ गया, जब राज्य सरकार के मंत्री और वरिष्ठ नेता नितेश राणे (Nitesh Rane) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विपक्ष और एक विशेष समुदाय को लेकर कई बेहद आक्रामक और विवादित बयान दे डाले. राणे ने ईद-उल-अजहा (बकरीद) (Eid-ul-Adha), मदरसों (Madrasas), गौ तस्करी पर कड़े कानून मकोका (MCOCA) के इस्तेमाल और कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) पर सिलसिलेवार तीखे हमले किए. उन्होंने अवैध पशु व्यापार और गौ तस्करी के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा उठाए गए हालिया सख्त कानूनी कदमों का बचाव करते हुए कहा कि हिंदुत्व विचारधारा पर आधारित यह सरकार गौ रक्षकों को निशाना बनाने वाले तत्वों के खिलाफ किसी भी हद तक जाने को तैयार है. उनके इस बयान के बाद महाविकास अघाड़ी और सत्ता पक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. यह भी पढ़ें: When is Bakrid 2026 in India: भारत में 27 या 28 मई, कब मनाई जाएगी बकरीद? जानें सही डेट, धार्मिक महत्व और कुर्बानी की फज़ीलत
राहुल गांधी पर तीखा हमला: बताया ‘पाकिस्तानी एजेंट’
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नितेश राणे ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर बेहद गंभीर और व्यक्तिगत आरोप लगाए. राणे ने दावा किया कि राहुल गांधी देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना केवल पड़ोसी देश को खुश करने के लिए करते हैं.
राणे ने पत्रकारों से कहा, ‘राहुल गांधी एक पाकिस्तानी एजेंट की तरह काम कर रहे हैं. वे अपनी जुबान से पाकिस्तान के पक्ष में बात करते हैं और उस देश को खुश रखने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं. राहुल गांधी भारत में रहकर उस स्क्रिप्ट को पढ़ते हैं जो सीधे सीमा पार से आती है. पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को प्रसन्न करने के लिए ही वे यहां आकर पीएम मोदी के खिलाफ जहर उगलते हैं.’
बकरीद पर पर्यावरण का हवाला: ‘वर्चुअल बकरीद’ मनाने का दिया सुझाव
आगामी त्योहार ईद-उल-अजहा का जिक्र करते हुए महाराष्ट्र के मंत्री ने पर्यावरणविदों और पशु अधिकार संगठनों (जैसे पेटा) की भूमिका पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि जब भी हिंदू त्योहार आते हैं, तो समाज को सूखी होली खेलने, पानी बचाने या दिवाली पर पटाखे न फोड़ने जैसी नसीहतें दी जाती हैं, जबकि इन त्योहारों का हमारे धर्म में विशेष महत्व है.
राणे ने सवाल उठाते हुए कहा, ‘अगर हिंदू समाज को पर्यावरण के अनुकूल त्योहार मनाने के नियम और सुझाव दिए जा सकते हैं, तो इसमें क्या गलत है अगर यह कहा जाए कि आगामी ईद-उल-अजहा को भी इको-फ्रेंडली (पर्यावरण के अनुकूल) तरीके से मनाया जाए या इसे ‘वर्चुअल बकरीद’ के रूप में आयोजित किया जाए? हर साल इस त्योहार के बाद नालियों और सीवरों में खून बहता हुआ दिखाई देता है, तब पेटा (PETA) जैसी संस्थाएं या शाकाहारी भोजन का प्रचार करने वाले बॉलीवुड कलाकार पूरी तरह खामोश क्यों हो जाते हैं?’
गौ तस्करी पर लगेगा ‘मकोका’, वारिस पठान को दी चुनौती
राज्य में अवैध पशु व्यापार और गोमांस की बिक्री पर रोक लगाने के लिए महाराष्ट्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए राणे ने हाल ही में जारी एक सरकारी प्रस्ताव (Government Resolution – GR) का हवाला दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने अब एक नया नियम बनाया है जिसके तहत यदि कोई भी व्यक्ति अवैध रूप से गौ मांस की बिक्री, तस्करी या कुर्बानी से जुड़े नियमों के उल्लंघन में शामिल पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सीधे ‘मकोका’ (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम) के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी.
इसी मुद्दे पर उन्होंने एआईएमआईएम (AIMIM) के पूर्व विधायक वारिस पठान को सीधे चुनौती दी. राणे ने आरोप लगाया कि त्योहार के दौरान कई जगहों पर अवैध रूप से गोमांस बेचा जाता है। उन्होंने पठान को चुनौती देते हुए कहा कि वे उन इलाकों का दौरा करें जहां कथित तौर पर गौ तस्करी हो रही है, तब उन्हें जमीनी हकीकत का पता चलेगा. यह भी पढ़ें: When is Eid al-Adha 2026: जानें भारत में बकरीद की संभावित तारीख और महत्व
मदरसों में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य करने और लव जिहाद पर रुख दोहराया
अपने संबोधन के अंत में नितेश राणे ने राज्य के मदरसों और मस्जिदों को लेकर भी सख्त टिप्पणी की. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संदिग्ध गतिविधियों के कारण कई मदरसे इस समय सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी निगरानी में हैं. उन्होंने मांग की कि राज्य के सभी मदरसों में ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य रूप से सिखाया जाना चाहिए.
इसके साथ ही उन्होंने तथाकथित ‘लैंड जिहाद’ और ‘लव जिहाद’ के मुद्दों पर अपने पुराने रुख को दोहराते हुए कहा कि सरकार इन मामलों पर पूरी तरह सतर्क है और बहुसंख्यक समाज के हितों की रक्षा के लिए कानून के दायरे में हर जरूरी कदम उठाएगी. विपक्षी दलों ने राणे के इन बयानों को आगामी चुनावों को देखते हुए समाज में ध्रुवीकरण पैदा करने की कोशिश करार दिया है.

