नई दिल्ली। Birsa Munda 150th Jayanti: राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में आयोजित विशाल जनजातीय महा समागम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शामिल हुए। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर जनजातीय सुरक्षा मंच (JSM) के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग पहुंचे। सम्मेलन में धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों को अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी से बाहर करने और देश में डी-लिस्टिंग कानून लागू करने की मांग प्रमुख मुद्दे के रूप में सामने आई।
मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह गौरव और सौभाग्य की बात है कि देशभर के जनजातीय समाज के लोग अपनी संस्कृति और पहचान बचाने के लिए एक मंच पर एकत्रित हुए हैं। उन्होंने कहा कि देश में 12 करोड़ से अधिक जनजातीय आबादी है और सभी अपनी परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए एकजुट हो रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में “विधर्मी ताकतों” द्वारा आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को कमजोर करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि अब जनजातीय समाज यह संदेश देना चाहता है कि उनकी संस्कृति और परंपराओं के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सम्मेलन में डी-लिस्टिंग कानून की मांग को लेकर जोरदार आवाज उठी। जनजातीय संगठनों का कहना है कि संविधान में आदिवासी समाज को मिला आरक्षण और विशेष संरक्षण उनकी पारंपरिक जीवनशैली, सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए दिया गया था। ऐसे में जो लोग धर्म परिवर्तन कर चुके हैं और आदिवासी परंपराओं से अलग हो गए हैं, उन्हें ST सूची से बाहर किया जाना चाहिए। संगठनों ने आरोप लगाया कि बीते दशकों में मिशनरी गतिविधियों के जरिए आदिवासी इलाकों में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण कराया गया, जिससे समाज की मूल पहचान प्रभावित हुई है।
दिल्ली में हुए इस महा समागम में छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों समेत देशभर के आदिवासी समुदायों ने भाग लिया। कई राज्यों से पारंपरिक वेशभूषा और लोक वाद्ययंत्रों के साथ रैलियां निकालकर लोगों को दिल्ली रवाना किया गया। आयोजकों का दावा है कि यह हाल के वर्षों में आदिवासी समाज का सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन साबित हो सकता है।


