दुर्ग और बिलासपुर में भी कमिश्नर प्रणाली लागू, डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने की पुष्टि
रायपुर। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने राज्य के दो प्रमुख शहरों, दुर्ग और बिलासपुर में कमिश्नर प्रणाली लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा है कि दोनों शहरों में इस नई प्रशासनिक व्यवस्था को लागू करने की तैयारियां जोरों पर हैं। यह कदम कानून व्यवस्था को मजबूत करने और शहरी प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
पृष्ठभूमि
वर्तमान में, छत्तीसगढ़ में रायपुर और बिलासपुर में कमिश्नर प्रणाली लागू है। यह प्रणाली पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) स्तर के अधिकारी को पुलिस कमिश्नर के रूप में नियुक्त करती है, जो शहर की कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार होते हैं। इस प्रणाली के तहत, पुलिस कमिश्नर को मजिस्ट्रियल शक्तियां भी प्राप्त होती हैं, जिससे वे त्वरित निर्णय ले सकते हैं और अपराधों पर अंकुश लगाने में अधिक सक्षम होते हैं। दुर्ग और बिलासपुर जैसे बड़े और तेजी से विकसित हो रहे शहरों में भी इसी तरह की व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
विस्तृत जानकारी
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया है कि दुर्ग और बिलासपुर में कमिश्नर प्रणाली लागू करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में आवश्यक प्रस्ताव तैयार कर लिए गए हैं और जल्द ही इसे कैबिनेट में मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। इस प्रणाली के लागू होने से इन शहरों में पुलिसिंग की कार्यप्रणाली में सुधार होगा और आम जनता को बेहतर सुरक्षा मिलेगी। पुलिस कमिश्नर के सीधे नियंत्रण में रहने से अपराधों की रोकथाम और जांच में तेजी आएगी। इसके अतिरिक्त, यह प्रणाली शहरी विकास और नागरिक सुविधाओं के प्रबंधन में भी सहायक सिद्ध हो सकती है।
मुख्य बिंदु
- दुर्ग और बिलासपुर में कमिश्नर प्रणाली लागू करने की तैयारी।
- उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने की घोषणा।
- कानून व्यवस्था को मजबूत करने और शहरी प्रशासन को प्रभावी बनाने का लक्ष्य।
- प्रस्ताव कैबिनेट मंजूरी के लिए तैयार।
प्रभाव और आगे की स्थिति
कमिश्नर प्रणाली के लागू होने से दुर्ग और बिलासपुर के नागरिकों को सुरक्षा के लिहाज से काफी राहत मिलने की उम्मीद है। अपराधों में कमी आने और त्वरित न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी। साथ ही, पुलिस विभाग में जवाबदेही भी बढ़ेगी। यह कदम राज्य सरकार की शहरी विकास और सुरक्षा को प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। भविष्य में, यदि यह प्रणाली सफल रहती है, तो इसे राज्य के अन्य बड़े शहरों में भी विस्तारित किया जा सकता है।
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