कानून मंत्री किरेन रिजिजू (Photo Credit: Twitter/@airnewsalerts)
Parliament Special Session 2026: संसद के विशेष सत्र (Parliament Special Session) के दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन (Women’s Reservation and Delimitation) से जुड़े ऐतिहासिक विधेयकों पर निर्णायक मोड़ आ गया है. संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू (Union Parliamentary Affairs Minister Kiren Rijiju) ने गुरुवार को लोकसभा (Lok Sabha) में सूचित किया कि शुक्रवार, 17 अप्रैल को शाम 4 बजे इन विधेयकों पर मतदान (वोटिंग) होगा. इससे पहले सदन में सरकार और विपक्ष के बीच इन प्रस्तावों पर लंबी और विस्तृत चर्चा की जाएगी. यह भी पढ़ें: Amit Shah vs Akhilesh Yadav in LS: लोकसभा में महिला आरक्षण पर तकरार: अखिलेश यादव ने टाइमिंग पर उठाए सवाल, अमित शाह ने ‘जाति जनगणना’ पर दिया बड़ा आश्वासन
15 से 18 घंटे तक चलेगी बहस
केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने सदन को बताया कि इन विधेयकों के महत्व को देखते हुए चर्चा के लिए पर्याप्त समय आवंटित किया गया है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि यदि आवश्यकता हुई, तो बहस की अवधि को बढ़ाया भी जा सकता है. उन्होंने कहा, ‘इन तीन विधेयकों पर चर्चा लगभग 15 से 18 घंटे तक चलेगी. सभी सदस्यों को अपनी बात रखने के लिए उचित समय दिया जाएगा.’
सदन में विपक्ष ने मांगा ‘डिवीजन वोट’
इससे पहले गुरुवार को लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया गया. इस दौरान सदन में काफी गहमागहमी देखने को मिली. जब विधेयक को चर्चा के लिए लाने का प्रस्ताव रखा गया, तो विपक्ष ने रिकॉर्डेड वोटिंग यानी ‘डिवीजन’ की मांग की.
आमतौर पर सदन में ध्वनि मत (Voice Vote) का उपयोग होता है, लेकिन चुनौती दिए जाने पर पर्चियों और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम का उपयोग किया गया. प्रारंभिक परिणामों के अनुसार, विधेयक के समर्थन में 251 और विरोध में 185 वोट पड़े. बाद में हुई एक अन्य प्रक्रिया में 333 सदस्यों ने हिस्सा लिया और किसी ने भी परहेज (Abstain) नहीं किया. यह भी पढ़ें: Delimitation Bill 2026: लोकसभा में आज पेश होगा परिसीमन विधेयक, विपक्ष ने ‘खतरनाक योजना’ बताकर किया कड़ा विरोध
कानून मंत्री ने पेश किए तीन महत्वपूर्ण विधेयक
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन में तीन प्रमुख विधेयक पेश किए:
- 131वां संविधान संशोधन विधेयक, 2026: यह महिला आरक्षण को सक्षम बनाने और परिसीमन की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए है.
- परिसीमन विधेयक, 2026: निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण से संबंधित.
- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026: केंद्र शासित प्रदेशों के प्रासंगिक कानूनों में बदलाव के लिए.
शुक्रवार को होने वाली वोटिंग इन कानूनों के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर है कि परिसीमन और आरक्षण के पेचीदा मुद्दों पर विभिन्न दल किस तरह का रुख अपनाते हैं. संसद में जारी इस विशेष सत्र ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है.

