Kondagaon. कोंडागांव। कोंडागांव नगर के भट्टीपारा इलाके में वन्यजीव सांभर के मांस की सूचना मिलने पर वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो महिलाओं को गिरफ्तार किया है। शनिवार दोपहर लगभग 12:30 बजे यह कार्रवाई वन मंडल कोंडागांव और वन उड़नदस्ता (फ्लाइंग स्क्वॉड) की संयुक्त टीम द्वारा की गई। वन विभाग को सूचना मिली थी कि किसी महिला के घर पर संदिग्ध मांस रखा गया है। मौके पर पहुंचकर टीम ने घर की तलाशी ली और लगभग 3 किलो सांभर का मांस, जिसे 8 अलग-अलग पैकेटों में रखा गया था, बरामद किया। छापेमारी के दौरान उषा बाई रजक और संगीता निर्मलकर नाम की दो महिलाओं को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने यह मांस खाने के लिए धमतरी से खरीदा था।
साथ ही कुछ हिस्से को बेचने की बात भी उन्होंने स्वीकार की है। कोंडागांव रेंजर प्रतिक वर्मा ने बताया कि यह मामला गंभीर है और जांच के लिए उनकी टीम धमतरी भी गई है। वहां से पांच अन्य संदिग्धों को पूछताछ के लिए कोंडागांव लाया जा रहा है। रेंजर वर्मा ने कहा कि पूछताछ पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि सांभर को कहां और किसने मारा। वन विभाग आरोपियों के पुराने रिकॉर्ड की भी जांच कर रहा है। मांस की मात्रा को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि यह मामला व्यापारिक उद्देश्य से खरीदी-फरोख्त से जुड़ा हो सकता है। जब्त मांस को जांच के लिए भेजा गया है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत सभी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वन विभाग ने जनता से अपील की है कि वन्यजीवों का शिकार करना, उनका मांस खरीदना या बेचना गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों की सूचना तुरंत विभाग को दें। आरोपियों से पूछताछ और बरामद मांस की जांच जारी है। वन विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई एक चेतावनी के रूप में है कि वन्यजीव संरक्षण कानून का उल्लंघन किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारी यह भी बता रहे हैं कि भविष्य में ऐसे मामलों पर सतत निगरानी और सक्रिय जांच की जाएगी। कोंडागांव प्रशासन और वन विभाग का उद्देश्य
वन्यजीवों
की सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी अवैध गतिविधि को रोकना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अवैध शिकार और मांस की बिक्री को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बर्दाश्त की जाएगी। इस कार्रवाई से यह संदेश गया कि वन्यजीवों का संरक्षण सिर्फ कानून के अनुसार ही नहीं, बल्कि समाज की जिम्मेदारी भी है। वन विभाग की टीम ने स्थानीय नागरिकों से सहयोग मांगा है ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों को रोका जा सके और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

