बिलासपुर। सतनामी समाज पर विवादित बयान देने वाले कथावाचक आशुतोष चैतन्य महाराज को बिलासपुर पुलिस ने गुरुवार को कथास्थल से गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कथावाचक को 14 दिनों की न्यायिक रिमांड पर जेल भेजने का आदेश दिया है। न्यायालय में पेशी के दौरान माहौल तनावपूर्ण रहा और परिसर में भारी भीड़ जमा होने से हंगामा भी हुआ। जानकारी के अनुसार, तखतपुर के टिकरीपारा में हो रही श्रीमद् भागवत कथा महापुराण के दौरान कथावाचक आशुतोष चैतन्य ने सतनामी समाज
को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
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उसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आते ही सतनामी समाज के लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। समाज के सदस्यों ने कथावाचक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए तखतपुर थाने का घेराव किया। हालात तनावपूर्ण होते देख पुलिस बल तैनात करना पड़ा। मतभेद बढ़ते देख एडिशनल एसपी अर्चना झा ने तत्काल मामला संज्ञान में लिया और प्राथमिक जांच के बाद कथावाचक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 353(2) और एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद पुलिस ने कथास्थल से ही आशुतोष चैतन्य को हिरासत में लेकर न्यायालय में पेश किया।
कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी, वकीलों ने खदेड़े असामाजिक तत्व
कथावाचक को लेकर अदालत पहुंची भीड़ के कारण कोर्ट परिसर में भारी हंगामे की स्थिति बन गई। जानकारी के मुताबिक, कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा गाली-गलौज और नारेबाजी की गई। इस पर अधिवक्ताओं ने स्थिति संभालते हुए इन तत्वों को कोर्ट परिसर से बाहर खदेड़ दिया। पुलिस भीड़ को नियंत्रित करने में जुटी रही। हालांकि कथावाचक ने अपने बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी थी, लेकिन समाज के लोग गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे। एडिशनल एसपी ने आश्वासन दिया था कि मामले की विधिवत जांच कर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
सामाजिक तनाव को देखते हुए पुलिस सतर्क
वीडियो वायरल होने के बाद से ही क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई थी। समाज के नेताओं ने इसे उनकी आस्था पर आक्रमण बताया और कहा कि इस तरह के बयानों से सामाजिक सद्भाव बिगड़ता है। प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए गांव और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून पर भरोसा रखने की अपील की है। वहीं, न्यायालय ने आरोपों की गंभीरता और सामाजिक माहौल को ध्यान में रखते हुए कथावाचक को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इस घटना ने छत्तीसगढ़ में एक बार फिर धार्मिक भावनाओं और सामाजिक सौहार्द को लेकर चर्चा छेड़ दी है। प्रशासन अब मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई करेगा।

