मुम्बई : भारत के सौर ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ी सफलता के रूप में, आईआईटी बॉम्बे के एक स्टार्टअप, एडवांस्ड रिन्यूएबल टैंडम-फोटोवोल्टिक्स इंडिया (ART-PV इंडिया) ने एक नए प्रकार का सौर सेल विकसित किया है। इस सौर सेल ने 29.8% दक्षता हासिल की है, जो भारत में अब तक दर्ज की गई सर्वोच्च दक्षताओं में से एक है।
इसका अर्थ है कि यह लगभग 30% सूर्य के प्रकाश को बिजली में परिवर्तित कर सकता है, जो नियमित सौर पैनलों की तुलना में बहुत अधिक है। मौजूदा सौर पैनल सूर्य के प्रकाश की 20% तक ऊर्जा को परिवर्तित करता है। यह नया सौर सेल एक विशेष दो-परत डिज़ाइन में पेरोव्स्काइट और सिलिकॉन का एक साथ उपयोग करता है, जिसे टैंडम सौर सेल के रूप में जाना जाता है। पेरोव्स्काइट से बनी ऊपरी परत उच्च-ऊर्जा वाले सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करती है, जबकि निचली सिलिकॉन परत शेष ऊर्जा को अवशोषित करती है। यह डिज़ाइन सौर सेल को अधिक सूर्य के प्रकाश को एकत्र करने और अधिक बिजली का उत्पादन करने में सक्षम बनाता है।
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने मंगलवार को आईआईटी बॉम्बे स्थित राष्ट्रीय फोटोवोल्टिक अनुसंधान एवं शिक्षा केंद्र (एनसीपीआरई) का दौरा किया और वैज्ञानिकों से बातचीत की तथा पेरोवस्काइट टैंडम सोलर सेल प्रयोगशाला सहित महत्वपूर्ण प्रयोगशालाओं का दौरा किया। उन्होंने इस नवाचार की प्रशंसा करते हुए इसे एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर और स्वच्छ ऊर्जा में भारत की आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
एनसीपीआरई की शुरुआत 2010 में आईआईटी बॉम्बे में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के सहयोग से हुई थी। पिछले 15 वर्षों में, एमएनआरई ने इसके कार्यों के लिए 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रदान की है। अब, मंत्रालय आईआईटी बॉम्बे में एक पायलट निर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए एआरटी-पीवी इंडिया को लगभग 83 करोड़ रुपये (10 मिलियन डॉलर) भी दे रहा है। इससे प्रयोगशाला की सफलता को एक ऐसे उत्पाद में बदलने में मदद मिलेगी जिसका बड़ी संख्या में उत्पादन किया जा सके।

