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झांकी देखने निकला था कृष्णपाल, ऐसे बन गए देश में स्वामी चिन्मयानन्द

सरकार में गृह राज्यमंत्री रहे स्वामी चिन्मयानन्द लंबे इंतजार के बाद अब जेल के चारदीवारी के पीछे पहुंच चुके हैं। राममंदिर के आंदोलन से लेकर राजनीतिक गलियारों में रसूख कायम करने वाले चिन्मयानंद धीरे-धीरे विशाल साम्राज्य के स्वामी बनते चले गए। बता दें कि चिन्मयानंद मूलरूप से गोंडा जिले के परसपुर क्षेत्र के त्योरासी रमईपुर के रहने वाले हैं। इनके बचपन का नाम कृष्णपाल था. पॉलीटेक्निक की पढ़ाई करने के दौरान झांकी देखने के लिए दिल्ली गए तो वहां से लौटे नहीं।

सालों तक परिवार से दूर तथा गुमनामी में रहकर उन्होंने संत से लेकर बड़ा सियासी पद हासिल किया. कृष्णपाल करीब 20 वर्ष की उम्र में घर छोड़ दिया था. उस वक्त वह मनकापुर में पॉलीटेक्निक कर रहे थे. वहां से गणतंत्र दिवस की झांकी देखने दिल्ली गए और फिर लौट के नहीं आए. उन्होंने इंटरमीडिएट की शिक्षा परसपुर के तुलसी स्मारक इंटर कॉलेज में हासिल की.

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चिन्मयानन्द ने लखनऊ विश्वविद्यालय से एमए की डिग्री हासिल की थी. स्वामी चिन्मयानंद का शाहजहांपुर में आश्रम भी है और वहां उनका एक लॉ कॉलेज भी है. अस्सी के दशक में चिन्मयानंद शाहजहांपुर आ गए और स्वामी धर्मानंद के शिष्य बनकर उन्हीं के आश्रम में रहने लगे. धर्मानंद के गुरु स्वामी शुकदेवानंद ने ही मुमुक्षु आश्रम की नींव रखी थी।

अस्सी के दशक के आखिरी में देश में राम मंदिर आंदोलन जोर पकड़ रहा था. इस आंदोलन में चिन्मयानंद ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और भाजपा में शामिल होकर राजनीतिक सफर का आगाज किया. श्रीराम जन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य डॉ. रामविलास वेदांती ने बताया कि चिन्मयानंद राम मंदिर आंदोलन से जुड़े थे. वह अयाध्या आते-जाते रहते थे. यह सन् 1988 और 1990 के दौरान यह राम मंदिर के आंदोलन में हिस्सा लेते थे।

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मंदिर आंदोलन में सभी संत जुड़े थे. उनमें से एक यह भी थे। विश्व हिंदू परिषद से जुड़े तमाम साधु-संत पहले इस आंदोलन से जुड़े. इस दौरान चिन्मयानंद भी इसमें शामिल हो गए. हालांकि उन्होंने इनका कोई अलग से घटनाक्रम बताने से इनकार कर दिया। कहते हैं कि मंदिर आंदोलन के समय चिन्मयानंद ने महंत अवैद्यनाथ के साथ मिलकर राम मंदिर मुक्ति यज्ञ समिति बनाई और इसी के जरिए ये मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका निभाने लगे। बाद में दूसरे बड़े संत रामविलास वेदांती और रामचंद्र परमहंस समेत तमाम संतों को भी राम मंदिर आंदोलन से जोड़ लिया गया।

सात अक्टूबर, 1984 को चिन्मयानंद ने सरयू तट पर राम जन्मभूमि आंदोलन का संकल्प लिया. 19 जनवरी, 1986 को वह राम जन्मभूमि आंदोलन संघर्ष समिति के राष्ट्रीय संयोजक बने.1989 में स्वामी निश्चलानंद के अधिष्ठाता पद छोड़ने के बाद चिन्मयानंद मुमुक्षु आश्रम आ गए।

गौरतलब है कि स्वामी शुकदेवानंद विधि महाविद्यालय में पढ़ने वाली एलएलएम की एक छात्रा ने 24 अगस्त को एक विडियो वायरल कर स्वामी चिन्मयानंद पर शारीरिक शोषण और कई लड़कियों की जिंदगी बर्बाद करने के आरोप लगाए और उसे व उसके परिवार को जान का खतरा बताया था।

वीडियो सामने आने के बाद छात्रा लापता हो गई थी. इस मामले में 25 अगस्त को पीड़िता के पिता की ओर से कोतवाली शाहजहांपुर में अपहरण और जान से मारने की धाराओं में स्वामी चिन्मयानंद के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया गया था. इसके बाद स्वामी चिन्मयानंद के अधिवक्ता ओम सिंह ने पांच करोड़ रुपय रंगदारी मांगने का भी मुकदमा दर्ज करा दिया था।

छात्रा ने स्वामी चिन्मयानंद पर करीब नौ माह तक यौन शोषण करने, दुष्कर्म कर उसका विडियो बनाने, नहाने का विडियो बनाने और उन्हें गायब कर साक्ष्य मिटाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं. 20 सितंबर को उप्र पुलिस की एसआईटी ने चिन्मयानंद को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया. उन्हें कोर्ट ने 14 दिन के लिए जेल भेज दिया है। 23 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चिन्मयानंद की पेशी है।

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